Top 10 moral stories in hindi

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Top 10 moral stories in hindi..हमें जीने की राह बताती है… एक समय एक चिड़ीमार ने चिड़िया को फंसाने के लिए जाल फैलाया…उस जाल में दो ऐसे पक्षी फंस गए जो हमेशा साथ रहते थे …हमेशा साथ साथ उड़ते थे…. वह दोनों पक्षी उस समय उस जाल को लेकर आकाश में उड़ चले….चिड़ीमार उन दोनों को आकाश में उड़ते देखकर भी निराश नहीं हुआ..जिधर जिधर वह पक्षी जाते, उधर उधर वह उनका पीछा करता रहा और दौड़ता रहा… वन में एक मुनि ने उस समय पक्षियों का पीछा करते हुए उस चिड़ीमार को देखा तो मुनि ने पूछा कि मुझे बड़ा आश्चर्य लगता है कि आकाश में उड़ते हुए उन दोनों पक्षियों का पीछा आप पृथ्वी पर दौड़ कर कर कर रहे हो? आप कभी भी उन पक्षियों को पकड़ नहीं पाओगे तो फिर पीछा क्यों कर रहे हो?

चिड़ीमार ने जवाब दिया यह दोनों पक्ष आपस में अभी मिले हुए हैं और मेरे एकमात्र जाल को लिए जा रहे हैं….लेकिन यह थोड़ी देर बाद में आपस में एक दूसरे से झगड़ेगे तब वह मेरे वश में आ जाएंगे…..

थोड़ी देर बाद दोनों पक्षी आपस में झगड़ने लगते हैं और लड़ते-लड़ते पृथ्वी पर गिर पड़े …जब मौत के फंदे में फंसे हुए आपस में नाराज होकर के एक दूसरे से लड़ रहे थे, उसी समय उस चिड़ीमार ने चुपचाप उनके पास जाकर उन दोनों को पकड़ लिया……दोस्तों यह hindi kahani हमें बताती है कि जब तक हम परिवार की तरह एक हैं तब तक ही safe हैं…

Table of Contents

Top 10 moral stories in hindi

…एक बार एक गांव में एक किसान का घोड़ा घर से भाग गया..किसान के परिचित और रिश्तेदार दुःख जताने के लिए आए और कहने लगे कि बहुत बुरा हुआ! अब खेती कैसे करोगे? किसान बोला कि शायद बुरा हुआ, शायद अच्छा हुआ..परिचित मन ही मन सोचने लगे कि इसमें तो अच्छाई की कोई बात नहीं है ..दूसरे दिन घोड़ा वापस आ गया और साथ में सात जंगली घोड़े भी ले कर के आ गया…परिचितों और पड़ोसियों ने किसान को बधाई दी और कहा कि आपकी तो किस्मत ही खुल गई ..किसान बोला शायद हां ..शायद नहीं ..दूसरे दिन किसान का बेटा जंगली घोड़े पर बैठा तो घोड़े ने गिरा दिया और किसान के लड़के की पैर की हड्डी टूट गई ..रिश्तेदार आए और उन्होनें किसान को अफसोस जताया कि बुरा हुआ !किसान ने कहा ,शायद बुरा हुआ .शायद अच्छा हुआ … पाँच सात दिन  बाद राजा को बलि के लिए आदमी की जरूरत पड़ी.. किसान के लड़के की बहादुरी के किस्से सैनिकों ने सुन रखे थे..उस लड़के को लेकर सैनिक चले जाते हैं ..वहां पर दरबार में पंडित जी मना कर देते हैं कि लड़के का पैर टूटा हुआ है..इसको वापस भेज दो ..गांव वाले आते हैं और किसान को कहते हैं कि आप तो बहुत भाग्यशाली हो कि आपका बेटा वापस आ गया है …किसान बोला :शायद हां शायद नहीं. मित्रों! यही जीवन हैं.. यहाँ कुछ भी निश्चित नहीं है.. जो राजा है आज वो रंक बन जाता है.. रंक राजा बन जाता है… आज जो अमीर है वो कल गरीब हो सकता है… गरीब देखते ही देखते अमीर बन जाता है.. इसलिए जो है उसका अहंकार ना करो… नहीं है तो चिंता ना करो.. भविष्य में हो जाएगा.. चपरासी का बेटा collector बन जाता है और कलेक्टर का बेटा बाबू भी नहीं बनता है…Top 10 stories in hindi का भाव है कि हर सत्ता, ज्ञान और वस्तु देश काल के संदर्भ में ही सत्य है.. पूर्ण सत्य कुछ भी नहीं है…..

Top 10 moral stories in hindi

एक बार एक महात्मा जी ने गाँव वालों को को खाने पर बुलाया.. संत महाराज ने शिष्य से कहा की नमक खत्म हो गया है.. बाज़ार से थोड़ा नमक लेते आना.. मूल्य ना ज्यादा देना है ना कम… शिष्य ने कहा गुरुजी! मेरी चुटकी सी होशियारी से थोड़ी कम कीमत पर ख़रीद लूँ तो क्या दिक्कत है…चार पैसे बचा लूँ तो अच्छा ही है..गुरुजी ने कहा की इससे गाँव बर्बाद हो जायेगा.. गाँव वालों ने पूछा की महाराज इस छोटी से कीमत से गाँव कैसे बर्बाद हो जायेगा? महाराज बोले की कोई भी नमक जैसी चीज.. इतनी सस्ती.. फिर उसमें और कम कीमत लगा दे तो सोचो उसकी कितनी मजबूरी रही होगी… मजबूर का जो फ़ायदा उठाता है वो बर्बाद हो जाता है.. गाँव के गाँव उजड़ जाते हैं.. हम सब प्रारम्भ में बहुत ही अच्छे और नेक होते हैं.. ईमानदारी रग रग में होती है.. पर धीरे धीरे चुटकी सी बेईमानी डालते रहते हैं.. पहले आटे में थोड़ा सा नमक डालते रहते हैं और एक दिन नमक में ही आटा डालने लग जाते हैं…

जैसे चुटकी चुटकी बेईमानी हमारे जीवन में शामिल हो जाती है वैसे वैसे हम कुतर्क गढ़ने लगने जाते हैं… गलत काम को येन केन जायज सिद्ध करने में लग जाते हैं.. जिस चुटकी भर बेईमानी का हमें विरोध करना चाहिए था, उस चुटकी भर बेईमानी की हम हर तरीके से पतली गली निकालने लग जाते हैं..

आज की कहानी बहुत ही छोटी है.. चुटकी सी है पर यह चुटकी बहुत कुछ कहती है.. कब हमारे जीवन में यह चुटकी भर शामिल हो जाता है..

चुटकी सी गलती.. चुटकी सी ना इंसाफी.. चुटकी सा पक्ष पात और चुटकी सा गलत.. चुटकी सा अन्याय… चुटकी सा भेदभाव.. चुटकी सा भ्रष्टाचार.. चुटकी सी शोषण.. सब यही कहते हैं की मैंने तो चुटकी सी बेईमानी की है.. लोग तो बहुत ज्यादा करते हैं..

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… एक बार एक राजा शम्सान भूमि के पास से लवाजमे के साथ में जा रहा था..एक भिखारी राजा को दिखा.. राजा ने कहा की तुम यहाँ क्या कर रहे हो? जावो मेरी रियासत में जहाँ कुछ मिलेगा… भिखारी बोला की मैं तो अभी भी सही जगह ही हूँ.. तुमको भी देर सवेर death clock यहीं आना है.मुझे तो पता है की यहीँ आना है एक दिन.. इसलिए यहीं बैठा हूँ… राजा बोला पागल कहीँ का.. पहले कोई आता है क्या.. जिस दिन आना होगा उस दिन अपने आप ही ले आयेंगे लोग.. ले तेरे पागलपन पर एक मुहर… रख ले अपने पास.. यदि कोई तुमसे ज्यादा पागल मिले तो उसे दे देना…. बहुत साल बीत गए.. भिखारी राजा के पास गया.. बड़ी मुश्किलों से राजा से मिल पाया.. राजा को मुहर वाली बात याद दिलाई.. राजा ने कहा की अब बस कुछ दिनों का मेहमान हूँ.. बहुत बीमार हूँ..भिखारी बोला की किस दिन जावोगे? राजा बोला पागल यह पता थोड़ा ही होता है… भिखारी बोला की फिर वजीर और बख़्शी को कहकर आपने व्यवस्था तो बहुत अच्छी कर ली होगी.. राजा बोला की ऐसा थोड़ा ही होता है… भिखारी ने कहा की राशन, सूखे मेवे, व्यंजन, मुहरे आदि तो भिजवा दी होगी आपने ताकि कोई परेशानी ना हो आपको… राजा बोला क्यों टेढ़ी बातें कर रहा है? मौत जहाँ ले जाती है वहाँ कुछ भी नहीं ले जा सकते… भिखारी ने कहा की आप तो बड़े आदमी हो.. मुझे क्या पता की आप भी मेरी तरह एक दिन भिखारी से हो जावोगे.. राजा बोला की वहाँ क्या राजा और क्या रंक! भिखारी ने राजा की दी मुहर निकाली और राजा को दे दी.. राजा ने कहा की मुझे क्यों दे रहे हो यह मुहर? भिखारी ने कहा की आपने ही कहा था की कोई ज्यादा पागल मिले तो उसे दे देना… मुझे तो सबसे बड़े पागल आप ही लग रहे हो… जब आपको पता है की फूटी कोडी भी मौत आने पर कोई साथ नहीं ले जा सकता… फिर किस राजपाट का अहंकार था उस दिन.. उस दिन क्या ताउम्र रहा अहंकार… आपको मालूम था की मंजिल तो आपकी और मेरी एक ही है.. मैं पहले जाकर बैठ गया जहाँ मुझे जाना है… पागल आप थे राजन! मैं नहीं……

Top10 moral stories in hindi

एक बगीचे में एक छोटा सा घास का फूल दीवार की ओट में दबा दबा सा जी रहा था.. ईंटों की आड़ थी.. ना सूरज उसको सता पाता, ना बारिश की बूँदे उस पर कभी गिरती.. उसके पास में ही गुलाब के फूल थे.. एक बार उस फूल ने ईश्वर से प्रार्थना की मुझे गुलाब का फूल बना दो.. ईश्वर ने उसको समझाया की इस झंझट में मत पड़.. पास पड़ोस के फूलों ने भी कहा की क्या करेगा गुलाब बनकर.. अभी कितने आराम में हैं ..सबने समझाया पर फूल जिद पर अड़ा रहा… ईश्वर ने उसको गुलाब का फूल बना दिया… गुलाब का फूल बनते ही उस फूल की मुसीबत प्रारंभ हो गयी.. जोर की आंधी चली.. गुलाब का फूल का रोम रोम हिल गया.. सूरज की तेज धूप पड़ी तो फूल कुम_ लाने लगा..बारिश आई और गुलाब के फूल की पंखुड़ियाँ नीचे गिरने लगी… तेज बारिश में शाम तक वो गुलाब का पौधा जमीं पर गिर पड़ा.. पास में दूसरे फूलों ने कहा की हमने तो पहले ही कहा था.. यूँ ही अपनी जिंदगी गँवा दी.. उस मरते हुऐ गुलाब के फूल ने कहा, नहीं रे पगले! जिंदगी गँवायी नहीं ,पाई है…. ताउम्र उस ईंट की आड़ में छुपकर परजीवी बनने से हजार गुना अच्छा है चौबीस घंटे के लिए गुलाब का फूल बनना.. तुमसे भी यही कहना है कि मेरी तरह आत्मा को जान लो.. मैंने सूरज, हवा, बारिश सबसे झंझट ले लिए.. मैं मरकर भी जी रहा हूँ.. तुम जीकर भी मर रहे हो.. मैंने एक दिन में मौत को पाकर भी जीवन पाया है… तुमने जीकर भी हवा ,बारिश, धूप का डर पाया है………. जीना है तो दोस्तों! जम कर जिओ… जम कर तभी जी पाएँगे जब डर को मार देंगे…

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Top 10 moral stories in hindi,,,,,एक बार एक बच्ची अपनी माँ के साथ मौसी के घर गयी.. मौसी ने बच्ची को चॉकलेट दी.. बच्ची ने नहीं ली.. माँ ने कहा फिर भी नहीं ली.. एक दो तीन फिर चार चॉकलेट सामने रखी पर नहीं ली.. बच्ची ने ना माँ के कहने पर चॉकलेट ली और ना मौसी  के कहने पर.. रवाना होते समय मौसी ने बच्ची को मुठ्ठी भर भर चॉकलेट दी और बच्ची ने ले ली… मार्ग में माँ ने पूछा की मौसी जब तुझे चॉकलेट लेने को कह रही थी, तब तूने ली नहीं.. अब क्यों ली.. बच्ची बोली की मैं ख़ुद लेती तो मेरी मुठ्ठी में मुश्किल से चार पाँच चॉकलेट आ पाती.. मुझे विश्वास था की मौसी बिना चॉकलेट जाने नहीं देगी और मौसी की मुठ्ठी मेरे से बड़ी है.. जब लेना ही है तब कम क्यों? मैं लेती चॉकलेट तो कितनी ले पाती और मौसी ने दी है तब कितनी मिली है….

moral story in hindi story in hindi और motivational story hindi में और साधु संतों के प्रवचनों में विश्वास करने वाला एक व्यापारी एक साधु महाराज के पास जाता है और उनके उपदेश सुनता है.. व्यापारी कहता है की महाराज आपकी सारी बातें सही है पर दुनियादारी में यह संभव नहीं है की हम लोभ और मोह माया को भूल जाए.. महाराज ने सुना और दूसरे दिन जब व्यापारी आया तो महाराज बोले की सेठ जी आपके जीवन के सिर्फ सात दिन बचे हैं.. अब सेठ जी उदास घर आये..मन को बहुत समझाया पर मौत का  तांडव मन पर इतना समाया कि मन बहुत ही भारी हो गया.. किसी भी काम में मन नहीं लग रहा.. व्यापारी साथी की बातों में रस नहीं रहा.. घर के छप्पन भोग भी फीके फीके लग रहे थे.. बैमन से खाना खाया… अब सेठ जी का ध्यान दुनियादारी की बजाय धर्म कर्म, पूजा पाठ, नीति और समाज सेवा में रमने लगा.. दुकान पर बैठते तो सिर्फ ऐसे बैठते जैसे किसी और की जागीर हो और वो सिर्फ रखवाले हो…. घर और रिश्तों को समय देना प्रारंभ कर दिया.. छोटों को प्रेम से सरोबार करते और बुजुर्गों की नशिहतें सुनते.. सेठ जी की जिन जिन से नाराज़गी थी सबको माफ़ कर दिया और सबके प्रति मैल भाव खत्म कर भाईचारा बना लिया.. आज सातवाँ दिन है.. सेठजी ने पत्नी से कहा की दुनिया में कुछ नहीं रखा है और आज से मेरी मंजिल ईश्वर है.. तुम भी दुनिया और दुनियादारी छोड़ कर साधु संतो की moral story सुनो और जीवन का मर्म समझ लो… सेठ जी ने सोचा की यह जीवन तो यूँ ही गँवा दिया.. अब महाराज से पूछूँगा की कुछ ज्ञान दे दो जिससे परलोक सुधर जाए… सेठ जी महाराज के पास बैठे हैं.. महाराज ने पूछा की कैसे बीते सात दिन? कितनी ठग लकड़ी की.. कितनी बेईमानी की.. कितने झूठ बोले.. कितने पाप किये.. कितनी लड़ाई की.. कितना पैसा कमा लिया इन सात दिनों में.. सेठ बोला की सच तो यह है की इन सात दिनों में सिर्फ मौत याद रही और ईश्वर और अच्छे कर्म याद रहे.. दुनिया और दुनियादारी की सारी बातें भूल गया महाराज!         महाराज बोले की जावो सेठ और अब ताउम्र बाकि की जिंदगी ऐसे ही जीना.. सेठ ने कहा की आपने तो कहा था की सात दिनों में मेरी मौत होगी.. महाराज बोले पगले! मौत तो सात दिनों में ही आती है.. कोई सोमवार को तो कोई रविवार को तो कोई बुधवार को मरेगा.. किसी ना किसी दिन तो किसी ने किसी वार को… सेठ जी आप कहते थे ना की महाराज दुनिया में रहते दुनियादारी ज़रूरी है.. जब मौत याद रहती है तो हम सब याद रखते हैं पर हम मौत को भूल जाते हैं तो सब भूल जाते हैं.. यह Moral story Hindi... best hindi kahani बताती है की दुनिया में रहते हुए सब कर्म करें मगर जो सच है उसको हमेशा याद रखें..

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Top 10 moral stories in hindi...एक बार एक महात्मा जी समंदर के किनारे टहल रहे थे.. महात्मा जी ने देखा एक बच्चा वहाँ रोरहा है ..महात्मा जी ने बड़े प्यार से पूछा कि बालक तुम क्यों रो रहे हो? बालक ने कहा कि मेरे हाथ में जो यह प्याला है उसमें मैं इस समंदर को भरना चाहता हूँ….पर मेरा प्याला बहुत छोटा है और समंदर मेरी कल्पना से परे विशाल है . समंदर मेरे प्याले में आ नहीं सकता ..इसलिए मैं रो रहा हूंँ….बच्चे की बात सुनकर महात्मा जी के चेहरे की हवाइयाँ उड़ने लगी और महात्मा जी की आंखों में उदासी आ गई .महात्मा जी बच्चे के सामने बच्चे की तरफ फूट-फूट कर रोने लगे ..महाराज सोचने लगे जीवन भर सब कुछ प्राप्त करने की तलाश मेंमैं रूपीअहंकार के साथ में जीता रहा जबकि जो ज्ञान था वही पर्याप्त था कल्याण के लिए… जीवन यूँ ही व्यर्थ में बीता दिया.. अपनी छोटी सी बुद्धि के सहारे सारी दुनिया का ज्ञान पाना चाहता था और उस चक्कर में जो ज्ञान प्राप्त किया उसका भी कोई प्रयोग नहीं कर पाया.

बालक ने महात्मा की तरफ़ देखा और अपना प्याला जोर से समंद की और फेंका और बोला की महाराज! मेरा प्याले में समंदर नहीं आ सकता मगर समंदर में मेरा प्याला तो जा ही सकता है… प्याला समंदर में जाए या समंदर प्याले में आये बात तो एक ही है… बात है अंदर समाने की.. अंदर प्रवेश की… भेद क्यों… प्याले और समंदर का…. महात्मा जी बालक की बात सुन रो रहे थे… पर बालक अब कहीं नहीं दिख रहा था… दोस्तों! बालक होता तो दिखता.. यह बालक हमारा अंतस मन है जो आपको और मुझे रोज़ समझाता है पर अपन नादाँ इसकी सुनते नहीं हैं..

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Top 10 moral stories in hindi ,,,,,एक बार एक साधु महाराज अपने आश्रम का रास्ता भूल गये.. वो एक गाँव मै पहुँच गये… गाँव में प्रवेश करते ही महाराज ने एक घर पर दस्तक दी.. घर से एक आदमी बाहर आया… महाराज ने कहा की मुझे रात विश्राम चाहिए.. उस आदमी ने कहा की महाराज आपको इस गाँव में कोई शरण नहीं देगा.. पता नहीं क्यों हमारे गाँव में सब साधु लोगों से नफ़रत करते हैं… आपको शरण नहीं मिलेगी… साधु महाराज ने हिम्मत नहीं हारी.. दो चार घर में गये पर सबने उनको मना कर दिया… साधु महाराज अंत में कोई स्थान देखकर खुले आंगन में पेड़ के पास बैठकर रात बितायी… सुबह साधु महाराज उस आदमी के पास जाते है जिसने रात शरण के लिए मना किया था… महाराज को देखकर वो कहता है की महाराज! हमने तो रात को ही मना कर दिया.. अब दुबारा क्यों आए आप ? महाराज ने कहा की रात को आपने मना कर दिया था.. मैं पूरी रात खुले में बैठा रहा… रात को बड़ा आनंद आया.. तारों को निहार निहार मन बहुत खुश हुवा… चाँद की चमक तो पूरी रात मेरे मन को हर्षित करती रही.. आप लोग मना नहीं करते तो मैं यह आनंद कैसे ले पाता…. मित्रो! जीवन शिकायतों का नाम नहीं है.. बहुत बार हम जीवन में छोटी छोटी शिकायतों को लेकर मन में गाँठ बांध लेते है….. नाराज होना बंद कर दो आज से ही… हर बात में पॉजिटिव attitude रखना प्रारंभ कर दो……

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Top 10 moral stories in hindi …...एक नगर में एक फकीर रहता .अल्हड़ मस्त.अपनी जिंदगी में जीने वाला.. फकीरी में अपने वजूद को भूल जाता.. कोई ज्ञान की बात पूछे तो सिर्फ एक दोहा बताता.. ना इससे कम ना इससे ज्यादा.. कोई कहता की महाराज पूरे जीवन में क्या सिर्फ इतना ही ज्ञान लिया.. फकीर बाबा कहते की मर्म तो एक ही है बाकि सब तो बातें है… औरत एक है.. वही माँ है… बहिन है.. बेटी है.. पत्नी है.. दादी है… ऐसे ही सच तो एक ही है.. लोग ग़ाफ़िल है… समझो तो दो आखर ही  काफी है बाकि तो लोग ताउम्र हजारों काग़ज काले करके ही भी कुछ नहीं समझ पाते.. फकीर का लोग मजाक उड़ाते.. कहते फकीर बाबा तो तोते की तरह एक ही रटा जवाब देते हैं… मगर फकीर से नगर का सेठ बड़ा प्रेम रखता.. फकीर के पास रोज़ आता.. हर दिन  फ़कीर एक ही बात कहता की करिये तो भी डरिये.. ना करिये तो भी डरिये… बुरे आदमी से सदा डरिये ही डरिये.. सेठ इस एक बात को हमेशा बड़े ध्यान से सुनता.. हर दिन सेठ फ़कीर की बात को बड़ी शिद्दत से सुनता.. सेठ रोज़ फ़कीर को एक मोहर देता और वो पगला सा फ़कीर लेता तो ऐसे लेता जैसे कुछ ना लिया हो और सेठ देता तो रोज़ ऐसे देता जैसे कुछ ना दिया हो.. फ़कीर और सेठ बिना बोले ही कभी कभी घंटो बैठे रहते.. बिना कुछ बोले.. बिना कुछ सुने.. एक दिन सेठानी बोली की पुरे नगर में आपके और फ़कीर के चर्चे हैं.. आप क्यों जाते हो वहाँ.. सारे लोग उस फ़कीर को पागल कहते हैं और आपको भी ज्ञान के लिए वही पागल मिला है एक… आज से उसको कुछ मत देना.. कह देना की रोज़ की क्या बकबक है की बुरे आदमी से डरो.. सबको पता है यह बात मगर आज सिद्ध करके बताओ.. सेठ फ़कीर के पास जाता है और सारी बात कह देता है.. फ़कीर कहता है सेठ जी आप घर जावो.. कभी समय आयेगा तब इस दोहे का मर्म बताऊँगा.. काफी समय बीत जाता है.. एक दिन सेठ के घर कोई आदमी दरवाजा खटखटाता है.. सेठानी दरवाजा खोलती है.. बाहर से आया आदमी घर में तेजी से प्रवेश करता है और जौर से चिल्लाया की मेरी पत्नी को जालिम सेठ ने मार डाला.. सेठ बेचारा कुछ समझ नहीं पाए की कौन है और क्या माजरा है.. सेठानी डरी बोली की आप जो चाहे ले लो.. आप कौन हैं और ऐसा झूठ क्यों बोल रहे हो.. सेठ सेठानी जितना मनाने की कोशिस करे वो आदमी इतना ही जौर से चिल्लाये.. इतने में लोग आ गए… पंचायती बढ़ी और वो आदमी राजा के पास जा पहुँचा.. सेठ बेचारा परेशान.कुछ समझ नहीं पाए… वो आदमी अपना पक्ष ऐसे रख रहा था की राजा को लगा की सेठ ने अपने भोग विलास में एक औरत की जान ले ली.. कातर नजरों से सेठ देखे मगर. सारे गवाह कह रहे थे मरी औरत की लाश सेठ के घर में मिली है.. न्याय की अदालत भी यही बोले की सारे सबूत सेठ के नीच होने और एक मासूम औरत के मारने की कहानी बयाँ कर रहे थे.. राजा ने सेठ को गिरफ्तार कर जेल भेजने का आदेश दिया.. इतने में वो आदमी जो अभी न्याय माँग रहा था.. जोर जोर से हँसता जा रहा था.. बकता जा रहा था….

करिये तो भी डरिये..ना करिये तो भी डरिये…बुरीगार से तो डरिये ही डरिये….अर्थात् कुछ करे तो भी डरें..ना करे कुछ तो भी डरें..बुरे आदमी से सदा डरें…

राजा और दरबारी कुछ समझ नहीं पा रहे थे.. वो आदमी फ़कीर था.. अब वो सारी बात बता रहा था.. उसने कहा की मैने जीवन में सेठ को एक ही बात बताई की बुरे आदमी से सदा दूर रहो.. सेठ तो पूरा विश्वास करता मगर सेठानी के यह बात औरों की तरह नहीं जंची.. मैने शमशान से आज मरी औरत की गाडी गयी बॉडी निकाली और सेठ के यहाँ यह सारा नाटक किया.. आपने भी सेठ को सजा सुना दी.. मैं तो फ़कीर ठहरा… सारा नगर मुझ पर हँसता है.. अरे भाई! जीवन में तुम सिर्फ एक ही नियम का पालन विश्वास से कर लो बाकी सारे काम अपने आप हो जायेंगे.. आप एक बात का पालन तो कर ही नहीं पाते.. और क्या सिखाता.. एक साधने से सब सध जायेगा और सब साधने से सब जायेगा.. पर आप समझते कहाँ हो..सेठ फ़कीर के पैरों में पड़ा था.. फ़कीर बेपरवाह एक ही धुन में कहता जा रहा था…. करिये तो डरिये.. ना करिये तो भी डरिये.. बुरीगार से तो डरिये ही डरिये…… #moral story# story# story in hindi#motivation#motivation story# success# success story# life# motivation# motivation quotes# motivational quotes# morivational quotes in hindi#inspiration# inspirational quotes.Top 10 moral stories in hindi…

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