मैनेजमेंट के गुरु हैं श्री राम

shree ram
मैनेजमेंट गुरु श्री राम...... -

Ramayan एक ग्रंथ नहीं है वरन् way of life है… Ramayan हमें नीति, संस्कृति, धर्म, कर्तव्यनिष्ठता, भाईचारा सिखाने के साथ सर्वांगीण विकास का रास्ता बताती है… Ramayan के नायक श्री राम हैं… Ramayan के यह नायक दिव्य पुरुष की बजाय मर्यादा पुरुषोत्तम है.ramayan के नायक श्री राम के मैनेजमेंट की आज पूरी दुनिया कायल है…..

. विश्वामित्र जी ताड़का वध के लिए  ramayan के श्री राम को लेकर गए क्योंकि उन्हें ramayan के श्रीराम के मैनेजमेंट पर भरोसा था.भगवान श्री राम ने ताड़का को मारने के लिए अयोध्या की प्रशिक्षित सेना का सहारा नहीं लेकर के वन में रहने वाले स्थानीय लोगों के सहयोग मात्र से ही ताड़का और अन्य राक्षसों का वध किया… उन्होंने स्थानीय लोगों से बाँस आदि से  धनुष बाण बनवाए और सामान्य लोहारों से अस्त्र शस्त्र बनाए और राक्षसों को मारने के लिए उनका प्रयोग किया..भगवान श्री राम सीखने की कला में बहुत ज्यादा विश्वास करते हैं…..ramayan के नायक श्री राम को जब 14 वर्ष का वनवास मिलता है तो भगवान श्री राम सहर्ष से स्वीकार कर लेते हैं.इसका प्रथम कारण है कि उनके लिए पिता का आदेश सर्वोपरि है और दूसरा कारण है कि भगवान श्री राम को पता था कि वह अभाव में भाव पैदा कर सकते हैं और मैनेजमेंट का मतलब यही है कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रयोग कैसे किया जाए अर्थात कम संसाधनों के अंतर्गत अधिक परिणाम कैसे आए? यही मैनेजमेंट है..इसको कहते हैं कि हल्दी भी नहीं लगनी चाहिए, फिटकरी भी नहीं लगनी चाहिए और रंग भी चोखा आना चाहिए..यही मैनेजमेंट है और ramayan के भगवान श्रीराम ने एक बार अनेकों  बार सिद्ध किया कि वे मैनेजमेंट के गुरु हैं…. Ramayan के भगवान श्री राम को 14 वर्ष का जो वनवास मिला था.उसमें भी उनके मन में निराशा का भाव ना था..ना पलायन का भाव था.ना वनवास उनके लिए समय व्यतीत करने जैसा था..उन्होंने वनवास के दौरान विभिन्न विषयों का ज्ञान ,अध्यवसाय, ऋषि-मुनियों से संपर्क कर अलौकिक ज्ञान, परा अपरा विद्या,अस्त्र-शस्त्र का ज्ञान, प्रकृति का ज्ञान ,व्यवहार का ज्ञान प्राप्त किया जो उनके जीवन में और उनकी जनता के लिए बहुत ही कारगर सिद्ध हुआ और इसी के बल पर उन्होंने राम राज्य की स्थापना की जो आज भी लोकतंत्र में आदर्श है…हर पार्टी चुनाव में आज भी राम राज्य की बात ज़रुर करती है…एक अच्छे मैनेजमेंट की निशानी है कि वह जब भी कोई समस्या आए तो अधीनस्थ या सहकर्मी नि:स्वार्थ भाव से यथा संभव सहयोग करे.

. Ramayan के भगवान श्री राम के व्यवहार से प्रभावित होकर   जटायु  नामक  साधारण पक्षी भी रावण जैसे महा योद्धा से लड़ लेता है… आज संगठन में किसी भी स्तर पर जब उच्चाधिकारी और अधीनस्थ के बीच में संबंध कटुता पूर्ण है , और विश्वास का अभाव है ऐसी परिस्थिति में भगवान श्रीराम का मैनेजमेंट मार्गदर्शन करता है… . सहकर्मी ramayan के भगवान श्री राम के लिए अनन्य आस्था, अनन्य विश्वास ,अनन्य प्रेम रखते थे. भगवान श्रीराम के मन में भी सम   दृष्टि का और सब के प्रति प्रेम का भाव था.भगवान राम ने प्रत्येक स्तर पर पग- पग पर सहभागिता का पालन किया…. Ramayan के भगवान श्री राम ने वनवास के दौरान लक्ष्मण और सीता जी को इस बात की शिक्षा दी थी कि आपातकाल में इंसान को अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए..चित्त  शांत रखते हुए युक्तियां सोचनी चाहिए….. Ramayan के श्री राम की शिक्षा के कारण जब रावण सीता जी का हरण करके ले जा रहा होता है, तो सीता माता जी अपना मनोबल गिरने नहीं देती है.. वह अपने दिव्य आभूषणों को गिराकर मार्ग प्रशस्त करती है ताकि सीता जी को ढूंढा जा सके…. वानर राज सुग्रीव ,नल- नीर,  जामवंत जैसे प्राणियों को रावण जैसे महा ज्ञानी और महा बलशाली के विरुद्ध युद्ध करने हेतु प्रशिक्षित करना व उनका भय खत्म करते हुए उनके मन में स्वयं के प्रति अनन्य विश्वास पैदा करना भगवान श्री राम के मैनेजमेंट  विरली युक्ति है जिन्हें आज भी मैनेजमेंट के शीर्ष, मध्य और निम्न स्तर पर  प्रयोग करना चाहिए..संगठन का उच्च अधिकारी या प्रबंधक अपने अधीनस्थों की भागीदारी नहीं करेगा तो वह सफल नहीं हो सकता……ramayan के भगवान श्री राम के आशीर्वाद और मार्गदर्शन में ही हनुमान जी लंका का दहन कर देते हैं अर्थात बिना कोई खर्चा किए रिटर्न इतना देते हैं.. Without any investment maximum returns…आज के मैनेजमेंट के लिए यही सीखने की जरूरत है कि खर्चा कम से कम हो और कार्य हो जाए. रुई और आग दोनों खुद की नहीं.  विभीषण के सहयोग से लंका  और रावण के गूढ़ रहस्यों का पता लगाकर रावण का जिस प्रकार वध किया, मैनेजमेंट का बहुत ही प्रभावी उदाहरण है….. भगवान श्री राम का यह दर्शन है कि मन में लोक कल्याण की भावना से कार्य किया जाए, तो उसके परिणाम हमेशा अच्छे ही आते हैं ..उन्होंने  विभीषण का साथ दिया क्योंकि वह सत्य के मार्ग पर था और रावण अनाचार के मार्ग पर था..इसलिए संगठन में मैनेजमेंट को उन लोगों का साथ देना चाहिए, जो सत्य के साथ है..अगर मैनेजमेंट सत्य का साथ देगा तो, उसे भी विभीषण जैसे अपनो की तरह विभिन्न तरीके की सूचनाएं साथीयों से उपलब्ध होती रहेगी, जो मैनेजमेंट की दक्षता को बहुत ज्यादा बढ़ा देगी… केवट भगवान श्रीराम को नौका पार कराते हैं और प्रतिफल में भगवान श्री राम उसको मित्र मान लेते हैं..इससे मैनेजमेंट का यह निष्कर्ष निकलता है कि संगठन में मैनेजमेंट लेवल पर अधिकारी के साथ में अगर कोई अधीनस्थ किसी भी रुप से सहयोग करता है तो उसमें वैसे ही कृतज्ञता का भाव होना चाहिए जैसा भगवान श्री राम में है….. मैनेजमेंट में यह जरूरी है कि मैनेजमेंट का उच्च अधिकारी या प्रबंधक संगठन में किसी के प्रति कोई पूर्वाग्रह नहीं रखे ..मैनेजमेंट के लिए यह जरूरी है कि वह सम दृष्टि रखे..साथ ही मैनेजमेंट को भगवान श्री राम से यह कला सीखनी चाहिए कि उनके मन में किसी के प्रति द्वेष नहीं है और भगवान गुणों से परिपूर्ण है..यही कारण है कि भगवान श्री राम के परिवार के सदस्य हो, चाहे साथ में काम करने वाले हो ,या कोई भी उनके जीवन में किसी भी रूप में संपर्क में आते हैं..वह भगवान श्रीराम के ही बनकर के रह जाते हैं ..इसलिए आज चाहे कोई भी बिजनेस हो ,किसी तरीके की problems हो या जीवन में किसी भी तरीके का कोई द्वंद हो..उसका समाधान राम की दृष्टि में नजर आता है..इसलिए हम आज भी कहते हैं कि रामराज्य हमारा एक आदर्श राज है जिसे भगवान श्री राम के युग में नागरिक देख चुके थे. उससे लाभान्वित हो चुके थे.. मंथरा और केक्केई का उनके प्रति बुरा व्यवहार होने के बावजूद भी ramayan के श्री राम के मन में उनके प्रति कोई दुर्भावना नहीं थी…भाइयों के प्रति अनन्य प्रेम और पितृ प्रेम का जो उदाहरण है वह विरला है. वचन प्रतिबद्धता भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम का दर्जा दिलवाती है….केवट, सुग्रीव, जामवंत, हनुमान, जटायु, अंगद मात्र ramayan के पात्र नहीं हैं… यह सब राम की ही अभेद दृष्टि है जिसमें सारी विभिन्नता खत्म हो जाती है .तेरा और मेरा भाव खत्म हो जाता है और मैनेजमेंट का ऐसा तंत्र तैयार होता है जिसमें उच्च और अधिनस्थ का भाव समाप्त होकर , सब संगठन के प्रति निष्ठा दिखाते हैं… वो सम्पूर्ण संगठन ramayan के श्री राम है… Special thanks to Shashikant Soni . असिस्टेंट कमिश्नर, राज्य कर विभाग, हनुमान गढ़, राज.. .

यह लेख महीपाल चारण hilodi ने लिखा है.. आप राजस्थान सरकार में SGST अधिकारी हैं…..

उपयुक्त समय का इन्तजार है तो यह लेख आपके लिए है…

भिखारी,राजा और जिंदगी

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