निबंध लिखने का तरीका

NIBANDH
निबंध कैसे लिखें -

निबंध लिखना एक कला है जो अभ्यास से विकसित होती है… निबंध और कुछ नहीं है, बसआपके पास में जो सामग्री है उसका क्रम बद्ध, व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुतीकरण ही है… Nibandh चाहे राज्य प्रशासनिक सेवा में लिखना हो या भारतीय प्रशासनिक सेवा की मुख्य परीक्षा में लिखना हो या किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में या बोर्ड के एग्जाम में लिखना हो, nibandh लिखने में विद्यार्थी बड़ी उहापोह स्थिति में रहते हैं और बड़े डरे डरे से रहते हैं कि क्या पता निबंध कैसे लिखा जाएगा?

मैंने 2010 में Nibandh कैसे लिखें? पुस्तक लिखी थी जिसमें Nibandh के सर्वांग पक्ष पर प्रकाश डाला था और आज में आपको उसी पुस्तक का सार तत्व बताने जा रहा हूँ…. प्रतियोगी परीक्षा में में Nibandh का विषय राजनीतिक, सामाजिक ,आर्थिक, दार्शनिक, पर्यावरणीय या समसामयिक मुद्दा हो सकता है….. सबसे पहले तो आप इस गलत शंका का निराकरण कर लें कि प्रतियोगी परीक्षा में किसी एक विषय पर या किसी विशिष्ट विषय पर Nibandh लिखने पर अधिक अंक आते हैं… Nibandh में जिनके ज्यादा अंक आते हैं, उसका कारण होता है कि उस विषय पर उनकी समझ कैसी है और उनके लिखने का और जो प्रस्तुतीकरण का तरीका कैसा है? आपकी अर्थशास्त्र पर पकड़ है और आप राजनीति के मुद्दे पर लिख रहे हैं या आप राजनीति शास्त्र के विद्यार्थी हैं और आप पर्यावरण के मुद्दे पर लिखते हैं तो वह पकड़ आप की विषय वस्तु में नहीं आ पाएगी जो विषय आपने वर्षों तक पढ़ा है इसलिए सबसे पहले इस बात को देखें कि जिस विषय पर आप nibandh और essay writing in hindi लिखने जा रहे हैं, उस विषय पर आपके पास में तथ्य क्या है और उस विषय पर आपके पास में RAWMaterial के साथ साथ में आपका विश्लेषण कैसा है?

अब हम दो तीन ESSAY writing in hindi की PRACTISE करते हैं…….. भ्र्ष्टाचार:एक वैश्विक बीमारी

. सर्वप्रथम भ्रष्टाचार को आप इस रूप में अति संक्षिप्त में परिभाषित करो कि भ्रष्टाचार देश काल की सीमाओं से परे एक वैश्विक और सार्वभौमिक बीमारी बन चुकी है….

. फिर आप भ्रष्टाचार जो है, उसका स्वरूप और अर्थ के पक्ष पर विभिन्न आयामों से प्रकाश डालो और उसमें इस बात पर जोर दो कि भ्रष्टाचार का अर्थ सिर्फ रिश्वत या पैसों का लेन-देन नहीं है बल्कि भ्रष्टाचार अपने आप में एक बहुत ही सर्वांग और व्यापक अवधारणा है जिसमें गलत कार्य को देखकर के चुप रह जाना भी भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है….

अब आप विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से संक्षेप में यह बताओ कि भ्रष्टाचार की सर्व व्यापकता किस-किस जगह, किस क्षेत्र में और किस किस रूप में और घनत्व की दृष्टि से उसके विभिन्न जो आयाम हैं, उस पर प्रकाश डालिए…

आपको भ्रष्टाचार के विभिन्न रूपों और आयाम की व्याख्या करते समय इस बात का ध्यान रखना है कि भ्रष्टाचार ना सिर्फ राजनीतिक आर्थिक और प्रशासनिक रूप में बल्कि यह नैतिक रूप से और पर्यावरणीय रूप में भी इसके जो आयाम है ,उस पर जोर डालते हुए सिद्ध करना है कि भ्रष्टाचार सिर्फ और सिर्फ कानूनी मुद्दा नहीं है बल्कि इसके बहुत सारे आयाम है..

. इस चरण में आप भ्रष्टाचार की पृष्ठभूमि पर चर्चा करें और यह सिद्ध करने की कोशिश करें कि भ्रष्टाचार तब से है जब मानव सभ्यता ने शुरुआत की और आर्थिक, राजनीतिक ,सामाजिक, नैतिक, ऐतिहासिक और विभिन्न कानूनी एवं विभिन्न पर्यावरणीय पारिस्थितिकी के संदर्भ में सूचित कीजिए कि भ्रष्टाचार एक बहुआयामी समस्या है जिसकी पृष्ठभूमि में बहुत सारे कारण है…..

. इस चरण में आप भ्रष्टाचार की उपस्थिति के विभिन्न क्षेत्रों का संक्षेप में परिचय देते हुए थोड़ी भारतीय संदर्भ में ज्यादा चर्चा करें और यह सिद्ध करें की समस्या निश्चित रूप से चिंताजनक है मगर विभिन्न तरीके के कानून, विभिन्न तरीके की संस्थाएं ,गुड गवर्नेंस की अवधारणा का आगमन, सूचना का अधिकार ,सोशल ऑडिट, एंटी करप्शन ब्यूरो और सीबीआई की सक्रियता के साथ सीवीसी की बढ़ती भूमिका और भारत सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा करप्शन फ्री, शून्य भ्रष्टाचार की अवधारणा का प्रचार प्रसार करना, इस तरफ आशा के संकेत हैं जिनसे हम आने वाले दिनों में उम्मीद कर सकते हैं कि पूर्णतया खत्म होनेमें भले ही समय लगे, परंतु कमी जरूर आ जाएगी ..

हम सब मिलकर दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ में इस दिशा में कुछ सार्थक प्रयास करें तो परिणाम और जल्दी आ सकते हैं…..

अंत में Nibandh में निष्कर्ष रूप में आपको भी यह कहना है कि कोई भी समस्या ऐसी नहीं है जिसका समाधान संभव नहीं है….. सरकार और प्रशासन की दृढ़ इच्छाशक्ति और समाज द्वारा उच्च एवं नैतिक मानक मूल्यों की स्थापना करना और अपने बच्चों में परिवार के द्वारा नैतिक संस्कृति का पुष्पन और पल्लवन करना और भौतिकवाद पर चोट करना तथा जनता की भागीदारी, सूचना का अधिकार, पारदर्शिता, सोशल ऑडिट जैसे नवाचार और भ्रष्टाचार निवारक संस्थाओं की सक्रियता और उनकी भूमिका में बदलाव तथा अधिकार युक्त करना….. कानून का सही अनु पालन, शिक्षा का हथियार प्रभावी बनाना, मजबूत इरादे, सादा जीवन, प्रसासनिक और राजनीतिक सुधार जैसे सुधार की चर्चा के साथ में किसी भी समस्या की तरह अंत में यही कहो कि कोई भी समस्या ऐसी नहीं है जिसका समाधान संभव नहीं है और हमें नकारात्मक पक्षों की बजाय सकारात्मक पक्षों की भी चर्चा करनी है और आशावाद के साथ में प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं को ईमानदार रहने में विश्वास करते हुए इस समस्या का समाधान करना है… यह एक दीर्घकालीन समस्या है जिसका समाधान भी दीर्घकाल में ही संभव है…..

अब आप समझ गए होंगे कि किसी भी विषय पर essay writing in hindi लिखने के लिए सर्वप्रथम आपको उस विषय को अति संक्षिप्त में बताते हुए परिचय देना होता है….. अंत में क्रम बद्ध ,बातों का सिलसिलेवार तार्किक तरीके से प्रस्तुतीकरण बहुत जरूरी है ..इसके साथ ही Pistpeshan दोष अर्थात पुनरावृति का दोष नहीं होना चाहिए जिसमें एक ही पक्ष पर आप ज्यादा चर्चा कर दें.. एक ही बात को आप बार-बार कहते रहे…. मित्रों! Nibandh लिखने के लिए आपके पास में कच्ची सामग्री का होना बहुत जरूरी है..निबंध लेखन एक कला है जो समय के साथ में विकसित होती है..इसके लिए जिस विषय पर आप Nibandh लिखना चाहते हो, उस विषय पर आपकी समझ बहुत अच्छी होनी चाहिए.आपके पास में RAW Materialके रूप में सामग्री बहुत ही अच्छी होनी चाहिए…. . जब आप परीक्षा में Nibandh लिख रहे हैं तब आपके मन में यह भाव होना ही नहीं चाहिए कि मैं निबंध लिख रहा हूं …आप यह समझो कि आप से किसी विषय पर आपके विचार लिखने के लिए घर पर ही कहा जा रहा है या घर पर ही आप निबंध लिख रहे हैं…. आप nibandh लेखन को यूं समझो कि हम रेलगाड़ी में यात्रा कर रहे हैं और सामने बैठा व्यक्ति हमसे यह पूछता है कि भारत सरकार की विदेश नीति पर आपके क्या विचार है.. उस समय आप पूर्वाग्रहों से रहित रहते हुए एक अपनी जानकारी की जानकारी वैज्ञानिक तरीके से अपनी बात में कहते हो ,वही essay writing in hindi है… ..

Nibandh लेखन के लिए आपको निबंध की एक उत्कृष्ट पुस्तक पढ़ने के साथ-साथ में राष्ट्रीय स्तर की पत्रिका और व्यक्तित्व विकास से संबंधित पत्रिका पढ़नी चाहिए और अपनी एक खुद की शब्दावली विकसित करनी चाहिए जिसमें आप यह तय कर ले कि उस शब्दावली का प्रयोग तो आपको परीक्षा में करना ही करना है..मेरे एक मित्र कहते थे कि मैंने तय कर रखा है कि कुछ भी निबंध पूछे अंत में यह यह बात तो परीक्षा में लिख कर आना ही है भले ही कुछ भी पूछे… जैसे वह कहते थे कि मुझसे कोई भी समस्या पूछे..मैं उस पर लिखूंगा कि जब देश की इतनी करोड़ जनसंख्या के इतने करोड़ हाथ उठेंगे, तो वह दिन दूर नहीं जब इस समस्या का समाधान हो जाएगा….. आप hindi nibandh का एक सांचा अपने दिमाग में रखिए कि मुझे यह निबंध इस तरीके से सिलसिलेवार लिखना है चाहे किसी भी विषय पर निबंध लिखने के लिए कहा जाय.आप उस स्थिति के लिए तैयार रहें कि आप को आकस्मिक रूप से कह दिया जाए कि इस विषय पर निबंध लिखना है और आप उस पर बहुत ही अच्छे तरीके से निबंध लिख लें यही आप का अभ्यास और लंबे समय की साधना की परिणति होगी . इसका परिणाम आपको परीक्षा में बहुत ही ज्यादा अच्छा देखने को मिलेगा..

. एक और hindi nibandhका चयन करके देखते हैं कि Nibandh कैसे लिखा जाता है?

विषय:क्या भारत को अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली अपना लेनी चाहिए ?

सर्वप्रथम आप यह बताओ कि विश्व में विभिन्न तरीके की आर्थिक ,राजनीतिक ,सामाजिक व्यवस्थाएं चलती है जो सुचारू रूप से चलती है …..

अब आप इस पक्ष पर चर्चा करो कि शासन क्या है और शासन का स्वरूप दुनिया में कैसे-कैसे हैं और संविधान क्या है और संविधान के दो रूप यानी कि संसदात्मक और अध्यक्षात्मक व्यवस्था को परिभाषित करो कि यह क्या है…

अब आप भारतीय संविधान का एक साधारण सा अति संक्षिप्त में इस रूप में परिचय दो कि भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा संविधान है, यह विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और जब हमारा संविधान बन रहा था, तो उस समय हमारे संविधान निर्माताओं के मन में संसदात्मक प्रणाली अपनाने के प्रति जो दृढ़ इच्छाशक्ति और विश्वास था, उसके क्या कारण थे? और क्यों उन्होंने यह शासन प्रणाली अपनाई? ..

अब आप वापस मुद्दे पर आते हुए यह चर्चा करो कि हमारे संसदीय प्रजातंत्र के इतने सालों के सफर में हमने क्या खोया है और क्या पाया है?…. हमारे संसदीय लोकतंत्र के कौन-कौन से मानक है जिन पर हम गर्व कर सकते हैं और भारतीय लोकतंत्र इतने सालों में किस रूप में कैसे पुष्पित और पल्लवित हुआ है और हम कैसे भारतीय संविधान की प्रस्तावना का पालन करके अपने राष्ट्र का निर्माण कर रहे हैं ?और एक विश्व महाशक्ति के रूप में हम उभरे हैं..साथ यह भी चर्चा करो कि हमने संसदीय लोकतंत्र के इतने सालों में यह आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक उपलब्धियां हासिल की है जिस पर हम गर्व कर सकते हैं…

… अब आप यह कहो कि सब कुछ विचारक या कुछ लोग संसदीय प्रणाली की विफलता के प्रति आशंकित होकर के यह कह रहे हैं कि हमारे संविधान में इतने सालों में यह यह कमियां है जो सुधरी नहीं है और तुलनात्मक रूप से उन लोगों के विचारों को भाव देते हुए बताएँ कि अध्यक्षात्मक प्रणाली में यह गुण है, जो संसदात्मक प्रणाली में देखने को नहीं मिल रहे हैं और हमारे इतने सालों के संसदीय लोकतंत्र में अभी भी आम व्यक्ति तक संसदीय प्रजातंत्र का लाभ नहीं पहुंचा है और भारत विभिन्न समस्याओं से घिरा हुआ है…इसलिए बहुत से लोग और विचारक यह कह रहे हैं कि हमें अध्यक्षात्मक प्रणाली अपना लेनी चाहिए जिसकी वजह से स्थायित्व, दीर्घकालीन लाभ नजर आएंगे… आप अध्यक्षात्मक व्यवस्था के लाभ और दुनिया में अध्यक्षात्मक व्यवस्था वाले राष्ट्र और उनकी प्रगति के इतने सालों के लेखा-जोखा का हल्का सा हिसाब इस लेख में कर सकते हैं अगर आप भारतीय प्रशासनिक सेवा की मुख्य परीक्षा में बैठे हैं या राज्य प्रशासनिक सेवा में बैठे हैं और hindi nibandhआपको 2000 शब्दों के आसपास लिखना है तब. …… अगर आप किसी दूसरी प्रतियोगी परीक्षा में बैठ रहे हैं और आप को संक्षेप में निबंध लिखना है तो आप विषय वस्तु को अति संक्षेप में कहते हुए अपने निबंध को समाप्त कर सकते हैं….

अब आपको कहना है कि भारत के लिए अध्यक्षात्मक प्रणाली उपयुक्त नहीं है और उसके कारणों में इस बात पर जोड़ दीजिए कि हमारे संविधान निर्माताओं ने बहुत सोच समझकर कर के संसदीय प्रणाली को अपनाया था, क्योंकि इसमें उत्तरदायित्व का भाव बहुत ज्यादा है और हम भारतीय एक क्षण के लिए भी बिना उत्तरदाई शासन की कल्पना नहीं कर सकते और सिंधु घाटी के लोकतांत्रिक स्वरूप, वैदिक व्यवस्था के लोकतांत्रिक स्वरूप से दक्षिण भारत की विभिन्न व्यवस्थाओं के लोकतांत्रिक स्वरूप की चर्चा करते हुए कह सकते हैं कि हम भारतीय उत्तरदायित्व को हमारी रगों में बसा चुके हैं…. हमारे संसदीय लोकतंत्र ने इतने सालों में बहुत कुछ पाया है और हमारा संसदीय लोकतंत्र बहुत नया-नया है और हमें इस पर गर्व करना चाहिए और हमने इतने सालों में संसदीय लोकतंत्र को इस रूप में तो स्थापित कर ही दिया है कि हम अपने आप में गर्व कर सकें क्योंकि हमारे देश को आजाद हुए बहुत ज्यादा साल नहीं हुए हैं और हमारा भारतीय आधुनिक संसदीय लोकतंत्र कोई बहुत ज्यादा पुराना है भी नहीं ,इसलिए हम इसके लिए भारतीय संविधान निर्माताओं को साधुवाद देते हैं कि हमें दुनिया का सर्वोत्कृष्ट रूप दिया…..

अंत में आप इस hindi nibandh का समापन इस रूप में कर सकते हैं कि भारतीय संविधान के जनक डॉ भीमराव अंबेडकर कहा करते थे कि कोई भी संविधान और कोई भी व्यवस्था अपने आप में बुरी नहीं होती यह उस बात पर निर्भर करता है कि उसको चलाने वाले लोग कैसे हैं?

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