5 hindi kahaniyan

moral story in hindi
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5 hindi kahaniyan …एक बार एक गांव में एक किसान का घोड़ा घर से भाग गया..किसान के परिचित और रिश्तेदार दुःख जताने के लिए आए और कहने लगे कि बहुत बुरा हुआ! अब खेती कैसे करोगे? किसान बोला कि शायद बुरा हुआ, शायद अच्छा हुआ..परिचित मन ही मन सोचने लगे कि इसमें तो अच्छाई की कोई बात नहीं है ..दूसरे दिन घोड़ा वापस आ गया और साथ में सात जंगली घोड़े भी ले कर के आ गया…परिचितों और पड़ोसियों ने किसान को बधाई दी और कहा कि आपकी तो किस्मत ही खुल गई ..किसान बोला शायद हां ..शायद नहीं ..दूसरे दिन किसान का बेटा जंगली घोड़े पर बैठा तो घोड़े ने गिरा दिया और किसान के लड़के की पैर की हड्डी टूट गई ..रिश्तेदार आए और उन्होनें किसान को अफसोस जताया कि बुरा हुआ !किसान ने कहा ,शायद बुरा हुआ .शायद अच्छा हुआ … पाँच सात दिन  बाद राजा को बलि के लिए आदमी की जरूरत पड़ी.. किसान के लड़के की बहादुरी के किस्से सैनिकों ने सुन रखे थे..उस लड़के को लेकर सैनिक चले जाते हैं ..वहां पर दरबार में पंडित जी मना कर देते हैं कि लड़के का पैर टूटा हुआ है..इसको वापस भेज दो ..गांव वाले आते हैं और किसान को कहते हैं कि आप तो बहुत भाग्यशाली हो कि आपका बेटा वापस आ गया है …किसान बोला :शायद हां शायद नहीं. मित्रों! यही जीवन हैं.. यहाँ कुछ भी निश्चित नहीं है.. जो राजा है आज वो रंक बन जाता है.. रंक राजा बन जाता है… आज जो अमीर है वो कल गरीब हो सकता है… गरीब देखते ही देखते अमीर बन जाता है.. इसलिए जो है उसका अहंकार ना करो… नहीं है तो चिंता ना करो.. भविष्य में हो जाएगा.. चपरासी का बेटा collector बन जाता है और कलेक्टर का बेटा बाबू भी नहीं बनता है… सब कुछ परिवर्तनशील है.. जैन दर्शन का स्यादवाद भी यही कहता है कि हर सत्ता, ज्ञान और वस्तु देश काल के संदर्भ में ही सत्य है.. पूर्ण सत्य कुछ भी नहीं है…..

Hindi kahani

5 hindi kahaniyan…..गौतम बुद्ध से किसी ने पूछा कि मैं क्या करूं? बुद्ध ने उत्तर दिया कि चलते रहो सिर्फ चलते रहो….. रुकना मत ..रुकना मृत्यु है .ठहराव है ..गति जीवन है .जैसे पर्वतों से नदी की धारा एक न एक दिन चलते चलते सागर में पहुंच जाती है..नदी के पास कोई नक्शा नहीं होता है.ना नदी का कोई मार्गदर्शक होता है..ना पंडित ना पुरोहित ना मित्र…पता नहीं कितने हिचकोले खाती -खाती मंजिल तक पहुंच ही जाती है नदी ..कौन पहुंचाता है नदी को सागर तक ?उसकी गति ..उसकी  continuity..व्यक्ति हो या नदी लगातार की गति ..जीवन दर्शन सिर्फ इतना ही की चलना है ..बस चलते जाना है… कोई सोच नहीं.. नदी जब रवाना होती है, मंजिल की कोई चिंता नहीं… मेरा धर्म और कर्म सिर्फ चलना… कोई सोच फ़िक्र नहीं… ना अतीत का महिमा मंडन, ना भविष्य की कोई चिंता.. सिर्फ वर्तमान में जीना.. उसका का भी कोई बोझ नहीं.. बस चलना है, बहना है, रुकना नहीं है…. भटकना मंजूर है मगर अटकना नहीं है…ठहरना नहीं.. रुकना नहीं… बाधा आए तो जोश दुगुना कर देना… किसी पड़ाव को मंजिल  मत मान लेना.. सफर में आए सभी पर्वत,पादप, पक्षी, मौसम सबको थैंक्स बोलने का… कभी भी हम इंसानों की तरह बक बक नहीं.. ख़ुद के गाल बजाने का नहीं.. मैं या मैंने का भाव नहीं.. काहे करें बकवास.. आंनद ही आनंद है चलने में… एक गाना है ना…. नदिया चले चले रे धारा तुझको चलना होगा….

Stories in hindi

5 hindi kahaniyan एक बार एक साधु महाराज अपने आश्रम का रास्ता भूल गये.. वो एक गाँव मै पहुँच गये… गाँव में प्रवेश करते ही महाराज ने एक घर पर दस्तक दी.. घर से एक आदमी बाहर आया… महाराज ने कहा की मुझे रात विश्राम चाहिए.. उस आदमी ने कहा की महाराज आपको इस गाँव में कोई शरण नहीं देगा.. पता नहीं क्यों हमारे गाँव में सब साधु लोगों से नफ़रत करते हैं… आपको शरण नहीं मिलेगी… साधु महाराज ने हिम्मत नहीं हारी.. दो चार घर में गये पर सबने उनको मना कर दिया… साधु महाराज अंत में कोई स्थान देखकर खुले आंगन में पेड़ के पास बैठकर रात बितायी… सुबह साधु महाराज उस आदमी के पास जाते है जिसने रात शरण के लिए मना किया था… महाराज को देखकर वो कहता है की महाराज! हमने तो रात को ही मना कर दिया.. अब दुबारा क्यों आए आप ? महाराज ने कहा की रात को आपने मना कर दिया था.. मैं पूरी रात खुले में बैठा रहा… रात को बड़ा आनंद आया.. तारों को निहार निहार मन बहुत खुश हुवा… चाँद की चमक तो पूरी रात मेरे मन को हर्षित करती रही.. आप लोग मना नहीं करते तो मैं यह आनंद कैसे ले पाता…. मित्रो! जीवन शिकायतों का नाम नहीं है.. बहुत बार हम जीवन में छोटी छोटी शिकायतों को लेकर मन में गाँठ बांध लेते है….. नाराज होना बंद कर दो आज से ही… हर बात में पॉजिटिव attitude रखना प्रारंभ कर दो….

5 hindi kahaniyan

एक बार एक राजा शिकार के लिए जाता है… रात होने को है और राजा रास्ता भटक जाता है और अंधेरे में रास्ता खोजते खोजते राजा एक कसाई के बाड़े में चला जाता है.. वहाँ बाड़े में चारों और गंदगी बिखरी पड़ी थी.. मवेशी मरे पड़े थे और मरे पशु की खाल जगह जगह लटकी पड़ी थी.. खून बिखरा पड़ा था- यत्र तत्र सर्वत्र…. राजा को लगा की थोड़ी देर और रुकना पड़ा तो दम घुट जाएगा…. पर क्या करे मजबूर और मजबूरी? रुकने के सिवाय कोई चारा नहीं था.. इतने में बाड़े का मालिक कसाई आ जाता है.. राजा रास्ता भटक जाने की बात कहता है और रात रुकने देने का निवेदन करता है.. कसाई राजा को इनकार कर देता है.. राजा बार बार निवेदन करे मगर कसाई साफ मना कर देता है.. कसाई अंत में कहता है कि हर आने वाला यहाँ रुकता है मगर सुबह हर कोई जाने से मना कर देता है.. राजा को बड़ा कौतुक होता है की ऐसी गंदगी में कौन रुकने की चाह रखता होगा… राजा के बार बार निवेदन पर अब कसाई मान जाता है पर शर्त यह रखी की राजा को जल्दी ही सुबह निकलना होगा…. अब राजा गंदी सी टूटी फूटी खाट पर सो जाता है.. गंदगी से परेशान राजा करवटें बदलता रहता है.. थोड़ी देर में राजा गंदगी का आदी हो जाता है और उसे नींद आ जाती है… कड़क धूप राजा पर. पड रही है.. दुपहरी सी है… राजा गहरी नींद में सोया हुवा है… कसाई आता है.. राजा को उठाता है.. राजा अनमना सा जाग जाता है… राजा को लगा की राज पाट की चिंता में कभी भी इतनी गहरी नींद नहीं आयी… राजा कसाई को जाने से मना कर देता है.. कसाई कहता है की मैंने तो पहले ही कहा था की कोई भी यहाँ से जाना नहीं चाहता है.. कसाई बक बक कर रहा है और राजा बे -परवाह नींद में सो जाता है….. दोस्तों!. यहाँ आप और हम भी जीवन में प्रारंभ में चुगली, नफ़रत, हिंषा और बुराई से दूर रहते हैं पर धीरे धीरे बुराई हम पर हावी हो जाती हैं… हमे भी कसाई की तरह गंदगी में रहना अच्छा लगने लग जाता 

Story in hindi

आज आप किसी collector , SP, मंत्री, धन्ना सेठ की सेवा या खुशामद यह सोचकर कर रहे हो कि आने वाले समय में यह लोग काम आयेंगे तो आप भूल कर रहे है.. बुजुर्ग कहते हैं राजा ,योगी ,अग्नि और जल से जितना संभव हो दूर रहो.. इनकी प्रीत बालू की भीत है… खैर! एक समय एक राजा था.. राजा ने घोषणा करवाई कि जीवन को समझाने वाले बड़े बड़े ग्रंथ वेद पुराण तो बहुत पढ़े सुने… आज तो एक वाक्य में जीवन का मर्म बता दे.. उसको मुँह माँगा ईनाम दूँगा… कुछ दिनों बाद एक ऋषि राजभवन में आते हैं और महाराज को एक अँगूठी देते हैं और कहते हैं –हे राजन! यह अँगूठी मेरे गुरु ने मुझे दी थी और कहा कि जब यूँ लगे कि अब तो कोई रास्ता नहीं बचा.. सारे विकल्प और साधन प्रयोग कर लिए… हर और से हिम्मत हारने पर इसमें रखे पर्चे का प्रयोग करना.. मुझे जीवन में कभी इसकी जरूरत पड़ी नहीं राजन… अब आप लें इस अँगूठी को… कभी लगे तो इसको काम में ले लेना…. बहुत दिन बीते.. इन दिनों में बहुत बार प्रॉब्लम भी आई.. हर बार राजा को लगता कि यह प्रॉब्लम तो स्वयं ही solve हो जायेगी…. एक बार राजा पर पड़ोसी राजा attack कर देता है… राजा को पराजय का मुँह देखना पड़ता है..सैनिक राजा को ढूंढते ढूंढते उसका पीछा करते वहाँ पहुँच जाते हैं.. अकेले बैठे राजा को लगता है कि अँगूठी में रखे फॉर्मुले को अब देखना ही पड़ेगा… राजा अँगूठी खोलता है और पर्ची निकालता है… पर्ची पर लिखा होता होता है कि हर बार ज्यों यह समय भी बीत जाएगा… राजा को वाक्य का मूल भाव समझ आ जाता है और चेहरे पर मुस्कान आ जाती है.. इतने में सैनिक पास से गुजर जाते हैं.. पेड़ की औट में होने के कारण राजा उनको दिखाई नहीं देता है… राजा हिम्मत रख वापस तैयारी करता है…धीरे धीरे अपनी सेना बनाता है और एक दिन वो भी आता है जब पड़ोसी राजा को युद्ध में हरा देता है… कोई दरबारी कहता है कि राजन! सुना है कि आपके पास कोई वाक्य है जिसके कारण हारा आदमी जीत जाता है.. राजा कहता है कि हाँ है… वो वाक्य है — हर बार ज्यों यह समय भी बीत जायेगा…. दोस्तों! जीवन में लड़ाई हमेशा खुद के भरोसे लड़ी जाती है.. सब कुछ बदल जाता है यहाँ.. बस धीरज का दामन थाम कर रखें… जवानी ,बुढ़ापा, धन दौलत, सत्ता, अहंकार, रूप, सुख दुःख, वैभव सब कुछ बदल जाता है….. यह शोहरतें, दौलतें हसरतें कुछ भी तो सदा रहता नहीं…कल जहाँ मैं था आज कोई और है.. यह भी एक दौर है और वो भी एक दौर था…. राजेश खन्ना….

Story in hindi

5 hindi kahaniyan …एक बार एक राजा ने बहुत  भव्य महल बनाया. उस राजा को लगता की कोई दुश्मन राजा कभी भी किसी भी रूप में हमला करवा सकता है..राजा ने भव्य महल के एक कमरे में रहना सरू किया.. एक दिन एक मित्र राजा उससे मिलने को आता है.. वो राजा कहता है की महल तो बहुत भव्य है…आपने महल के सारे दरवाजे बंद कर रखे हैं… आप अभी जिस कमरे में रह रहे हैं, इस कमरे को भी बंद कर दो.फिर आराम से रहो… आपका दुश्मन आपके सुरक्षाबलों को अपनी तरफ़ मिलाकर आपकी हत्या करवा सकता है… राजा जवाब देता है की सोचा तो मैने भी यही था.. अविश्वास भी हो गया अपने गार्ड पर…. लेकिन मैं दरवाजे में कैद रहकर नहीं जी सकता.. यह जीना भी कोई जीना है.. हर पल अविश्वास, डर और असुरक्षा… कैद और बंधन के पहरों का जीवन तो मुझे मौत से भी बदतर लगता है.मुझे खुले दरवाजे और खुली साँस में रहना बहुत अच्छा लगता है… तो मित्र राजा कहता है की अगर एक दरवाजे के खुलने में इतना आनंद है तो फिर दो दरवाजे के खुलने में कितना आनंद होगा… फिर तीन, चार, पाँच, छह ,सात, आठ, नौ ,दस ,ग्यारह……… अगर सारे दरवाजे खोल दो तो फिर देखो जीवन में कितनी खुशियाँ होगी.. दोस्तों! यह एक राजा और दूसरा राजा और कोई नहीं है.. एक हमारा बहिरमन है और दूसरा हमारा अंतरमन है.. बाहरी मन हमें बंदिशे सिखाता है.. डर, बंधन, बेचैनी और असुरक्षा सब उसके कारनामे हैं.. अंतरमन निज स्वरूप है.. खैर दोस्तों! आप अब समझ गए होंगे की हमने भी राजा के महल की तरह की जिंदगी में  विविध limit और पहरे बना रखे हैं…. अशोक फोन नहीं कर रहा है एक साल से, मैं क्यों करूँ उसको फोन…. गुप्ता जी बहुत दिनों से मेरे से उखड़े उखड़े से रहते हैं.. मैं क्यों बात करूँ? मेरी तो गलती नहीं है… मैं फोन नहीं करता होली दीवाली किसी भी अफसर. को… क्यों करूँ… बिना मतलब यूँ ही सोचेंगे की गरज है इसलिए फोन कर रहा है….. राधा आँटी कल कह रही थी मुझे तो नौकरों के मुँह लगना अच्छा नहीं लगता.. इनसे तो जितनी बदतमीजी से बात करे उतना ही अच्छा है.. मेरा मन कह रहा है की शुक्ला जी कुछ ना कुछ मेरा बुरा करने की सोच रहे हैं…..

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5 hindi kahaniyan एक महाराज एक बूढ़ी औरत के घर रोज़ खाना मांगने के लिए जाते.. औरत थोड़ी सनकी थी.. महाराज को खाना देना तो दूर उनको रोज़ अपमानित करती.. पड़ोस के लोग कहते कि महाराज क्यों इससे रोज़ अपमानित होते हो? एक घर छोड़ दो.. महाराज बोले कि मेरा कर्म &धर्म है याचना.. मना करे तो करे.. महाराज हिम्मत नहीं हारते हैं.. एक दिन बूढ़ी औरत गुस्से में आग बबूला बाहर निकली और महाराज की झोली में एक बड़ा सा पत्थर दे मारा.. महाराज बोले कोई बात नहीं माई! इतने समय बाद भाटा दिया है कभी आटा भी दोगी… मित्रो! धैर्य और कर्म बड़ी बात है… मेरे दादीसा बचपन में एक कहानी सुनाते थे.. एक आदमी बहुत आलसी था.. पड़ा रहता.. काम का ना काज का दुश्मन अनाज का.. एक दिन पत्नी ने चेतावनी दे कि आज कमाकर लाना.. खाली हाथ लौट आये तो आज भूखे ही रहना.. वो बेचारा इधर उधर गया पर कोई काम नहीं मिला.. अंत में थका हारा बेचारा चिंता में पड़ गया.. आज तो पत्नी खाना नहीं देगी.. क्या लेकर जाऊँ? कुछ लेजाने लायक भी तो नहीं दिख रहा.. इतने में उसको सामने मरा साँप दिखाई दिया.. उसने सोचा कुछ नहीं से तो यह साँप लेकर ही चला जाऊँ.. घर जाकर पत्नी को बताया कि बहुत मेहनत की पर कुछ नहीं मिला.. अंत में यह साँप मिला.. क्या करता इसको ले आया.. पत्नी बोली कि धर्म गर्न्थो में कर्म की महिमा बताई है.. ईश्वर ने आज यही लिखा था भाग्य में… हो सकता है इसमे ही कुछ अच्छा हो.. पत्नी ने पतिदेव को कहा कि साँप को छत पर फेंक आवो.. शाम को कुछ सोचेंगे कि क्या करना है… पति छत पर साँप को ले जाता है.. इसी दौरान एक बाज़ आता है जिसे मुँह में diamond का हार था.. साँप को देखकर बाज़ उस हार को फेंक देता है और मरे साँप को मुँह में पकड़कर ले जाता है… दोस्तों! कर्म की महिमा का इससे अच्छा उदाहरण नहीं हो सकता… कर्म कभी भी बेकार नहीं जाता.. मेहनत हमेशा रंग लाती है… सिर्फ और सिर्फ कर्म और अपना काम करते रहिए…….

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 👭👬👫फ्रेंड यह राजा महल और जिंदगी और कुछ नहीं है सिर्फ हमारे भाव हैं..5 hindi kahaniyan में राजा ने बहुत भव्य महल बनाया मगर उसके सिर्फ एक कमरे में रहने लगा वैसे ही हमारी जिंदगी के हजारों दरवाजे खुले हैं पर हमने अपने को पहरों में कैद कर रखा है.. यह कैद मन की है.. वर्मा जी मेरे घर नहीं आए.. मैं क्यों जाऊँ पहले उनके घर? ऐसी हजारों गाँठे हमारी रोज़ की लाइफ को मार रही है.. बहुत खुशियाँ दे सकती है कदमों की एक पहल. मन की एक अच्छी सी उड़ान… मगर पहरे बहुत हैं… प्रेम से और अच्छाई से भरी है यह दुनियाँ मगर यह इश्क ऐ दुनियाँ वाले बेकार की बातें करते हैं, पायल की गमों का इलम नहीं झंकार की बातें करते हैं.. आज से आप और हम एक पहल करते हैं की कोई आपको फोन नहीं कर रहा है तो आप कर लो.. शर्मा जी के यहाँ बिन बुलाये एक बार जाकर तो देखो.. उखड़े उखड़े से uncle को विद्या बालन सा good morning कहो तो सही… Peon रामलाल जी से एक बार पूछो तो सही की कैसे हो सा? मुझे किसी से बैर नहीं तेरी तूँ जाने वाला भाव एक बार लाइफ में लावो तो सही….5 hindi kahaniyan अच्छा लगे तो एक बार share करके देखो तो सही…. .

अगर आपको यह 5 hindi kahaniyanअच्छी लगी हो तो अपनी राय जरूर दें…

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