constitutional amendment in hindi

संविधान के प्रमुख संशोधन..
संविधान संसोधन अब तक.... -

constitutional amendment in hindi .भारत में संविधान संशोधन की प्रक्रिया दक्षिण अफ्रीका से ली गई है ….भारतीय संविधान का संशोधन( अनु.368) भारत के संविधान में परिवर्तन की प्रक्रिया है … सविधान संशोधन का अधिकार केवल संसद को है, राज्य विधान मंडल को नहीं है…भारत में संविधान का संशोधन तीन प्रकार से किया जा सकता है ….

1 संसद के साधारण बहुमत से: नये राज्यों का गठन,राज्यों का का पुनर्गठन, नाम परिवर्तन, राज्यों की सीमा परिवर्तन, विधान परिषद की स्थापना या लोप, संघ राज्य क्षेत्रों में मंत्रिमंडल का गठन…

2 संसद के दो तिहाई बहुमत से : मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व

3 संसद के विशेष बहुमत से और 50% से अधिक राज्य विधान मंडलों की मंजूरी…. केंद्रीय व्यवथापिका के कार्य और शक्तियों में परिवर्तन, प्रांतीय व्यवस्थापिका के कार्यों और शक्तियों में परिवर्तन, संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व में परिवर्तन, राष्ट्रपति का निर्वाचन, राज्यों की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार, केंद्र शासित प्रदेशों के लिए उच्च न्यायालय, संघीय न्यायालय, राज्यों के उच्च न्यायालय, संघ राज्य विधायी संबंध ,सातवीं अनुसूची का कोई भी विषय और संविधान संशोधन से संबंधित उपबंध..

संविधान में किये गये अब तक के प्रमुख संशोधन…

constitutional amendment in hindi

  • प्रथम संविधान संशोधन:1951 नौवीं अनुसूची जोड़ी गई… इस अनुसूची में शामिल कानून न्यायिक पुनरावलोकन शक्ति की परिधि से बाहर है..
  • सातवाँ संविधान संशोधन:1956 राज्य के 4 वर्गों की समाप्ति.14 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों को स्वीकृति.
  • दसवाँ संविधान संशोधन 1961 दादर नगर हवेली को जोड़ा भारतीय संघ में..
  • 12 वाँ संविधान संशोधन 1962 गोवा, दमन और दीव भारतीय संघ में शामिल..
  • 13 वाँ संविधान संशोधन 1962 नागालैंड राज्य बना
  • 14 वाँ संविधान संशोधन 1962 पांडिचेरी भारतीय संघ में शामिल
  • 24 वाँ संविधान संशोधन 1971 संसद कोई अधिकार है कि वे संविधान के किसी भी हिस्से का चाहे वह मूल अधिकार हो, संशोधन कर सकती है. राष्ट्रपति द्वारा संवैधानिक संशोधन विधेयक को मंजूरी दी जानी जरूरी की गई..
  • 25 वाँ संविधान संशोधन 1971…संपत्ति के मूल अधिकारों में कटौती की गई..अनुच्छेद 39( ख) एवं (ग) में वर्णित नीति निर्देशक तत्वों को प्रभावी करने के लिए बनाई गई किसी भी विधि को इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती है कि अनुच्छेद 14,19 और 31 द्वारा अभीनिश्चित अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती..मूल अधिकारों पर नीति निर्देशक तत्व को वरीयता दी गई..
  • 26 वां संशोधन अधिनियम 1971 प्रिवी पर्स और प्रांतीय राज्यों के पूर्व शासकों के विशेष अधिकारों की समाप्ति कर दी गई. .
  • 31 वाँ सविधान संशोधन अधिनियम 1972 लोकसभा सीटों की संख्या 525 से बढ़ाकर 545 कर दी गई. .
  • 35 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1974 सिक्किम की संरक्षण व्यवस्था को बर्खास्त करते हुए उसे भारतीय संघ का सहयोगी राज्य बनाया गया…
  • 36 वा संशोधन अधिनियम 1975 से सिक्किम को भारतीय संघ का पूर्ण राज्य बनाया गया..
  • 42 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1976 सबसे महत्वपूर्ण संशोधन..इसे लघु संविधान के रूप में भी जाना जाता है..इसमें स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों को प्रभावी बनाया गया.. प्रस्तावना में तीन शब्द जोड़े गए समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता…. नीति निर्देशक तत्व को मूल अधिकारों पर प्रधानता दी गई. .संसद द्वारा किए गए संविधान संशोधन को न्यायालय में चुनौती नहीं..मूल कर्तव्य जोड़े गए भाग 4 क अनुच्छेद 51क..लोकसभा और विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्ष कर दिया गया.
  • 44 वाँ संविधान संशोधन 1978 लोकसभा और विधानसभा का कार्यकाल दुबारा 5 वर्ष किया गया..संपत्ति को विधिक अधिकार बनाया गया अनुच्छेद (300 क ) ..राष्ट्रपति द्वारा आपात उद्घोषणा आंतरिक अशांति के आधार पर नहीं की जा सकती वरन सशस्त्र विद्रोह के आधार पर की जा सकती है. कैबिनेट की सलाह को पुनर्विचार के लिए एक बार भेजने की राष्ट्रपति की शक्ति ,परंतु पुनर्विचार के बाद यह बाध्यकारी होगी.. अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को राष्ट्रीय आपातकाल में भी निलंबित नहीं किया जा सकता…
  • 52 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1985 जिसे दल बदल विरोधी विधि के रूप में जाना जाता है.. इसके तहत संसद सदस्य एवं राज्य विधान मंडल के सदस्यों को दल बदल के मामले में अयोग्य ठहराने की व्यवस्था है.इसके विस्तार के लिए दसवीं अनुसूची को जोड़ा गया है..
  • 58 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1987 हिंदी भाषा में संविधान का प्राधिकृत पाठ उपलब्ध कराया गया और संविधान के हिंदी पाठ को समान विधिक मान्यता प्रदान की गई. .
  • 61 वा संविधान संशोधन अधिनियम 1989 मतदान की उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 कर दी गयी..
  • 69 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1991 दिल्ली का नाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली.. दिल्ली में 70 सदस्यीय विधानसभा
  • 70 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1992 दिल्ली- पुदुचेरी के निर्वाचित सदस्य राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में शामिल
  • 73 वा संशोधन अधिनियम 1993 पंचायती राज की स्थापना..अनुसूची 11भाग 9,अनुच्छेद 243( क -ण) जोड़े.. 29 पंचायती कार्यों की मदें जोड़ी गयी..
  • 74 वाँ संशोधन अधिनियम 1993 शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक स्थिति और सुरक्षा दी गई..इस उद्देश्य के लिए संविधान में नया भाग 9 का जोड़ा जिसे नगरपालिका नाम दिया गया . नई बारहवीं अनुसूची में नगरपालिका की 18 कार्यात्मक मदें जोड़ी गई..
  • 76 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1994..तमिलनाडु आरक्षण अधिनियम 1994 को नवी अनुसूची में न्यायिक समीक्षा से संरक्षण के लिए जोड़ा गया..1992 में उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी कि कुल आरक्षण 50% से अधिक नहीं होना चाहिए…तमिलनाडु में यह सीमा 69 कर दी गयी थी..
  • 77 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1995 ….सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों को पदोन्नति के लिए आरक्षण की व्यवस्था …इस संशोधन ने उच्चतम न्यायालय द्वारा पदोन्नति के संबंध में दिए गए निर्णय को समाप्त कर दिया.
  • 84 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 2001….लोकसभा एवं विधानसभा की सीटों की संख्या 2026 तक यही रहेगी…
  • 86 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 2002 प्रारंभिक शिक्षा को मूल अधिकार बनाया गया..नए अनुच्छेद 21 क में घोषणा की गई कि राज्यों को छह से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निशुल्क प्रारंभिक शिक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए..नीति निर्देशक तत्वों के मामले में अनुच्छेद 45 की विषय वस्तु बदल गई. राज्य सभी बालकों को 14 वर्ष की आयु पूरी की जाने तक निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने के लिए बंद करने का प्रयास करेगा..अनुच्छेद 51( क) के तहत एक नया कर्तव्य जोड़ा गया जिसे पढ़ा गया: यह हर भारतीय नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वे अपने बच्चों को चाहे वह उसके माता-पिता या अभिभावक 6 से 14 वर्ष की उम्र तक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराएं…
  • 89 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 2003 इस संशोधन अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग का दो भागों में विभाजन कर दिया गया है.. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग अनुच्छेद 338 और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग 338 ( क )
  • 91 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 2003 केंद्रीय मंत्री परिषद में प्रधानमंत्री समेत मंत्रियों की अधिकतम संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं होगी..राज्यों में मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों की अधिकतम संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं होगी..किंतु राज्यों में मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों की न्यूनतम संख्या 12 से कम नहीं होगी.
  • 92 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 2003 संविधान की आठवीं अनुसूची में चार अन्य भाषाएं जोड़ी गई. बोडो ,डोगरी ,मैथिली और संथाली..इसके साथ ही अनुसूचित भाषाओं की कुल संख्या 22 हो गई..
  • 93वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 2006 पिछड़े वर्गों को शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश संबंधी आरक्षण
  • 94 वाँ संशोधन अधिनियम 2008 जनजातीय मंत्री का पद बिहार से हटाकर झारखंड मे..
  • 95 वाँ संशोधन अधिनियम 2009. अनसूचित जाति जनजाति के लिए लोकसभा सीटों में आरक्षण 60 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष कर दिया गया..
  • 96 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 2011 आठवीं अनुसूची की प्रविष्टि 15 में उड़िया की जगह ओडिया शब्द..
  • 97 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 2011 भाग 9 b सहकारी समितियां जोड़ा गया…. अनुच्छेद 243 ZH – 243 ZT…. सहकारी समितियों को संवैधानिक दर्जा दिया गया..अनुच्छेद 19-1 C में सहकारी समितियां जोड़ा गया ..अनुच्छेद 43 b जोड़ा…
  • 99 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 2014 कॉलेजियम सिस्टम समाप्त कर राष्ट्रीय न्यायिक आयोग का गठन.
  • 100 वाँ संशोधन अधिनियम 2015 भारत और बांग्लादेश के बीच भू भागों का आदान प्रदान..
  • 101 वाँ संविधान संशोधन GST bill. .
  • 103 वाँ संविधान संशोधन में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को educational institutions और नियुक्तियों में 10% आरक्षण से संबंधित है..
  • संविधान संशोधन की बात आती है तब केसवानंद भारती प्रकरण का उल्लेख जरूर है… ..

केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य constitutional amendment in hindi

इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर अर्थात मूलभूत ढांचे को लेकर के ऐतिहासिक फैसला दिया था..केसवानंद भारती केरल के कासरगोड में ईडनीर मठ के मुखिया थे..इस केस ने सिद्ध कर दिया कि हमारा संविधान किसी भी सरकार से उपर है.. केसवानंद भारती केस में सुप्रीम कोर्ट में 68 दिनों तक बहस चलती रही और 68 दिनों बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया और तारीख थी 24 अप्रैल 1973….

केंद्र सरकार ने भूमि सुधार कानून बनाए और इनकी मदद से सरकार केसवानंद भारती के ईडनीर मठ के मैनेजमेंट पर कई सारी पाबंदी लगाने की कोशिश कर रही थी.. केसवानंद भारती ने सरकार की इन कोशिशों को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी और उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 26 का संदर्भ दिया .. संविधान का आर्टिकल 26 भारत के हर नागरिक को को धर्म-कर्म के लिए संस्था बनाने, उनका प्रबंधन करने और इस सिलसिले में चल अचल संपत्ति जोड़ने का अधिकार देता है…केसवानंद भारती का कहना था कि सरकार का बनाया कानून उनके संवैधानिक अधिकार के खिलाफ है और न्यायालय का दरवाजा खटखटाया…. सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संविधान का बुनियादी ढांचा नहीं बदला जा सकता..संसद इसे किसी भी संशोधन से नहीं बदल सकती….बुनियादी ढांचे का मतलब है संविधान का सबसे ऊपर होना..विधि का शासन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, संघ और राज्य की शक्तियों का बंटवारा, धर्म निरपेक्षता ,संप्रभुता, गणतंत्र, सरकार का संसदीय तंत्र ,निष्पक्ष चुनाव etc.संविधान का बेसिक स्ट्रक्चर यानी की मूलभूत ढांचा है… मूलभूत ढांचे में कोई भी परिवर्तन नहीं किया जा सकता और मूलभूत ढांचा संविधान क्या आधार स्तंभ है…

गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य constitutional amendment in hindi

संविधान के अनुच्छेद 13 में यह व्यवस्था की है कि संसद द्वारा ऐसा कोई भी कानून नहीं बनाया जाएगा जिसे संविधान के भाग तीन में वर्णित मूल अधिकारों का उल्लंघन होता हो..परंतु 1951 में संविधान के लागू होने के 1 वर्ष के भीतर ही प्रथम संशोधन करके एक नया अधिनियम पारित किया और इस अधिनियम द्वारा अनुच्छेद 31 के अंतर्गत प्रत्याभूत संपत्ति के अधिकार को सीमित कर दिया गया इस संशोधन की संवैधानिकता पर शंकरी प्रसाद बनाम भारत संघ पर विचार किया गया.. सुप्रीम कोर्ट ने शंकरी प्रसाद मामले में निर्णय देते हुए स्वीकार किया कि संसद मूल अधिकारों में किसी भी संविधान के अन्य उपबंधों की तरह संशोधन कर सकता है…सज्जन सिंह बनाम राजस्थान राज्य बाद में भी उच्च न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती शंकरी प्रसाद वाले निर्णय पर दृढ़ रहा….परंतु 1967 में उच्चतम न्यायालय ने गोलकनाथ बनाम पंजाब सरकार विवाद में अपने पूर्ववर्ती विषयों को उलट दिया और सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि संसद अनुच्छेद 368 की अधीन मौलिक अधिकारों को समाप्त करने या सीमित करने की शक्ति नहीं रखता है और यह निर्णय 11 न्यायाधीशों की पीठ ने दिया था और 6 न्यायधीश बहुमत में थे 5 अल्पमत में थे….

गोलकनाथ बनाम पंजाब सरकार विवाद constitutional amendment in hindi

हेनरी और विलियम गोलकनाथ परिवार के पास पंजाब के जालंधर में 500 एकड़ की भूमि थी…1953 में पंजाब सरकार ने कहा कि गोलकनाथ परिवार केवल 30 एकड़ जमीन अपने पास रख सकता है, बाकी की जमीन का कुछ हिस्सा किरायेदारों को मिलेगा और बाकी के जमीन का सरकार अधिग्रहण करेगी ..सरकार के इस फैसले के खिलाफ गोलकनाथ फैमिली ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन वहाँ हारने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की…गोलकनाथ परिवार ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत में सर्वोच्च न्यायालय में 1953 पंजाब भूमि अधिग्रहण कानून को ही यह कहते हुए चुनौती दी कि इससे उनके संपत्ति रखने, अर्जित करने, और उस पर कोई भी व्यवसाय करने के मूल अधिकारों का हनन होता है…साथ ही संविधान में प्रदत्त कानून के समक्ष समानता और सम्मान सुरक्षा के उनके अधिकारों का हनन हो रहा है …इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह था क्या मूल अधिकारों उनको संशोधन किया जा सकता है? क्या संविधान के अनुच्छेद 13( 3 )( a)में क्या संशोधन को कानूनी माना गया है?

इसी संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आर्टिकल 368 सदन को मौलिक अधिकारों को समाप्त करने या सीमित करने की शक्ति नहीं देता है…. सर्वोच्च न्यायालय ने अहम फैसला देते हुए कहा कि संसद के पास यह अधिकार नहीं है कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों को छीन सके या उनसे छेड़छाड़ भी कर सके…

इंद्रा गाँधी बनाम राजनारायण 1975 constitutional amendment in hindi

गांधी बनाम राजनारायण केस में भी सर्वोच्च न्यायालय ने बुनियादी संरचना की अपनी अवधारणा की पुष्टि की…

मेनका गांधी बनाम भारत संघ 1978 constitutional amendment in hindi

अनुच्छेद 21 में प्राप्त संरक्षण केवल कार्यपालिका की मनमानी कार्यवाही के विरुद्ध ही नहीं बल्कि विधानमंडल की कार्यवाही के विरुद्ध भी है.. जीवन जीने के अधिकार में निम्न बातें भी शामिल है; गरिमा के साथ जीने का अधिकार, विदेश भ्रमण का अधिकार, एकांतता का अधिकार ,प्राथमिक शिक्षा का अधिकार ,आहार पाने का अधिकार और जीविकोपार्जन का अधिकार…

मिनर्वा मिल्स बनाम भारत सरकार 1980

सर्वोच्च न्यायालय ने इस केस में बुनियादी विशेषताओं में न्यायिक समीक्षा और मूल अधिकारों तथा नीति निर्देशक सिद्धांतों के बीच संतुलन को जोड़कर बुनियादी ढांचे की अवधारणा को आगे विकसित किया…

मोहम्मद अहमद खान बनाम शाह बानो बेगम 1985

इस केस में स्त्री को भरण-पोषण पाने के अधिकार की विस्तृत व्याख्या की गई…

कीहोतो होल्लोहान बनाम जाचील्लहु 1992

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव को बुनियादी विशेषताओं में जोड़ा गया….

इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार 1992.. constitutional amendment in hindi

कानून का शासन बुनियादी विशेषताओं में जोड़ा गया.. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 16 (4) का आरक्षण केवल सेवा के प्रवेश हेतु है, ना कि पदोन्नति हेतु…. पिछड़े वर्ग को दिया गया आरक्षण 50% से ज्यादा नहीं हो सकता… न्यायालय राज्यों को क्रीमीलेयर की पहचान करने तथा उन्हें आरक्षण लाभों से वंचित करने का निर्देश दे सकता है… विशेषज्ञता क्षेत्र में कोई आरक्षण नहीं हो…

एस. आर.. बोंबई बनाम भारत सरकार 1994

एस..आर.बोमई बनाम भारत सरकार में संघीय ढांचे भारत की एकता और अखंडता, धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद, सामाजिक न्याय और न्यायिक समीक्षा को बुनियादी विशेषता के रूप में दोहराया गया.. धारा 356 के दुरुपयोग को रोकने पर बहुत ही क्रांतिकारी निर्णय दिया…

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Niti aayog नीति आयोग क्यों बनाया? https://www.india.gov.in/

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