Best hindi stories 2021

moral story in hindi
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Best hindi stories ...बड़ी कम्बख़त है यह मौत. कह कर क्यों नहीं आती मौत हम आदमी कितने समझदार हैं जो किसी के घर भी जाते हैं तो  कह कर जाते हैं.. एक इस मौत को देखो.. कुछ भी बतलाए बिना चली आती है.. पागल को यही पता नहीं की इंसान के कितने काम अभी अधूरे पड़े हैं.. आना है तो पहले थोड़ी सी दस्तक तो दे दरवाजे पर.. खैर ना ऐसा हुआ है और ना कभी होगा की मौतकह कर आये… एक बार एक राजा शम्सान भूमि के पास से लवाजमे के साथ में जा रहा था..एक भिखारी राजा को दिखा.. राजा ने कहा की तुम यहाँ क्या कर रहे हो? जावो मेरी रियासत में जहाँ कुछ मिलेगा… भिखारी बोला की मैं तो अभी भी सही जगह ही हूँ.. तुमको भी देर सवेर death clock यहीं आना है.मुझे तो पता है की यहीँ आना है एक दिन.. इसलिए यहीं बैठा हूँ… राजा बोला पागल कहीँ का.. पहले कोई आता है क्या.. जिस दिन आना होगा उस दिन अपने आप ही ले आयेंगे लोग.. ले तेरे पागलपन पर एक मुहर… रख ले अपने पास.. यदि कोई तुमसे ज्यादा पागल मिले तो उसे दे देना…. बहुत साल बीत गए.. भिखारी राजा के पास गया.. बड़ी मुश्किलों से राजा से मिल पाया.. राजा को मुहर वाली बात याद दिलाई.. राजा ने कहा की अब बस कुछ दिनों का मेहमान हूँ.. बहुत बीमार हूँ..भिखारी बोला की किस दिन जावोगे? राजा बोला पागल यह पता थोड़ा ही होता है… भिखारी बोला की फिर वजीर और बख़्शी को कहकर आपने व्यवस्था तो बहुत अच्छी कर ली होगी.. राजा बोला की ऐसा थोड़ा ही होता है… भिखारी ने कहा की राशन, सूखे मेवे, व्यंजन, मुहरे आदि तो भिजवा दी होगी आपने ताकि कोई परेशानी ना हो आपको… राजा बोला क्यों टेढ़ी बातें कर रहा है? मौत जहाँ ले जाती है वहाँ कुछ भी नहीं ले जा सकते… भिखारी ने कहा की आप तो बड़े आदमी हो.. मुझे क्या पता की आप भी मेरी तरह एक दिन भिखारी से हो जावोगे.. राजा बोला की वहाँ क्या राजा और क्या रंक! भिखारी ने राजा की दी मुहर निकाली और राजा को दे दी.. राजा ने कहा की मुझे क्यों दे रहे हो यह मुहर? भिखारी ने कहा की आपने ही कहा था की कोई ज्यादा पागल मिले तो उसे दे देना… मुझे तो सबसे बड़े पागल आप ही लग रहे हो… जब आपको पता है की फूटी कोडी भी मौत आने पर कोई साथ नहीं ले जा सकता… फिर किस राजपाट का अहंकार था उस दिन.. उस दिन क्या ताउम्र रहा अहंकार… आपको मालूम था की मंजिल तो आपकी और मेरी एक ही है.. मैं पहले जाकर बैठ गया जहाँ मुझे जाना है… पागल आप थे राजन! मैं नहीं…… दोस्तों सच यही है जो भिखारी कह रहा है मगर हम तो राजा हैं.. we dont trust in Best hindi stories

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राजा जनक स्वर्ग और नरक की मझधार में बैठे हैं.. आज तक यमराज के कभी समस्या नहीं आई पाप और पुण्य के लेखा जोखा में… राजा जनक वैदेही.. इंद्रियों पर नियंत्रण.. ज्ञान, विज्ञान, धर्म, नीति के जानकार… यमराज ख़ुद आज मोनिटरिंग कर रहे हैं.. ऐसा क्या हो रहा है की राजा जनक का विमान स्व संचालित व्यवस्था के तहत स्वर्ग नरक के बीच खड़ा है.. आदमी या तो स्वर्ग या नरक जाता है.. यह बीच वाली दुविधा कैसे? सारे लेखे देख लिए मगर हिसाब पकड़ में नहीं आ रहा… इतने में चित्रगुप्त पकड़ लेते हैं कारण को.. वो कहते हैं की  एक बार एक कसाई राजा जनक से पूछते हैं की इस रंग की गाय आपने जाती देखी  है क्या? राजा जनक बताते हैं की हाँ अभी अभी निकली है और पूर्व दिशा की और गयी है.. राजा जनक को पता नहीं की पूछने वाला कसाई है और वो गाय को मार देगा… राजा जनक को गाय हत्या का दोष लगा है.. चूँकि राजा जनक विदेही है.. पर थोड़ा सा पाप तो किया ही है.. थोड़ी सी अवधि के लिए ही सही मगर पाप के थोड़े से तो भागी है ही.. इस कारण नरक में थोड़ा सा रुकना पड़ा… दोस्तों कहानी का सार यह है की हम जाने अंजाने बहुत बार किसी दूसरे का नुकसान कर जाते हैं.. हमारी नागिन रूपी जीभ बस लपलप करती रहती है.. इसको बस बकबक से मतलब है.. कान का सुना बहुत बार गलत होता है मगर कभी कभी आँखों का देखा भी सच नहीं होता.. जीभ को जज मत बनने दो… एक और हिंदी कहानी भी है जो हमारे आसपास में अक्सर सुनाई जाती है की किसी भी नतीजे पर जाने से पहले और कुछ बोलने से पहले या किसी भी काम को करने से पहले कुछ देर रुको.. फिर निर्णय लो… जल्दी का काम शैतान का… खैर एक hindi kahani है.. समय एक सेठ सालों बिनज व्यापार करके गाँव आता है.. सेठानी को surprize देने के चक्कर में रात को घर में चोरों की तरह घुसता है.. सेठ घर के अंदर का हाल देखकर आग बबुला हो जाता है.. सेठानी के साथ यह पुरूष कौन.. सेठ तलवार ले आता है पर पिताजी की सीख थी की कोई भी काम करने से पहले कुछ सोचो.. कुछ रुको.. इतने में सेठानी जाग जाती है और साथ में सो रही बेटी को नींद से जगाती है.. सेठ आश्चर्य में.. सेठानी कहती है की आप तो यह पांच साल की थी तब छोड़कर व्यापार के लिए चले गए.. मैंने कैसे अपनी बेटी का ध्यान  रखा.. यह मैं ही जानती हूँ.. इसे मैं लड़के के भेष में रखती हूँ ताकि कोई परेशानी ना हो.. सेठ बोला! है भगवान! आपने बचा लिया…. दोस्तों! जीवन में धारणा बनावो पर थोड़ा सा समय लो.. कानों का कहना कम मानो.. आँखो देखी पर भी विश्वास थोड़ा सा समय लेकर करो.. मूल भाव इतना की किसी के कहने पर राय मत बनावो…हम भी राजा जनक की तरह एक नहीं हजारों सच ऐसे बोलते हैं जो हमारी नजर में सच होते हैं मगर वो सच नहीं होते.. एक गाँव में एक बूढ़ी औरत कहते जा रही थी की PTI बहुत खराब है.. PTI बहुत खराब है.. एक दिन PTI ने पूछा की माताजी आप रोज़ कहते हैं कि PTI खराब है.. आपका क्या बिगाड़ दिया PTI ने… माताजी बोला की बेटा ! मेरा तो दुनिया में कोई नहीं है.. अकेली रहती हूँ.. गाँव में माँग कर पेट भर लेती हूँ.. मेरा PTI क्या बिगाड़ करेगा? मेरे ना बेटे ना पोते.. किसको पिटेगा PTI? फिर आप माताजी PTI को खराब क्यों कह रही है… बेटा! मेरा क्या दोष? मैं तो सुनी सुनाई बातों पर कह रही हूँ की PTI खराब है.. दोस्तों! आप भी किसी की सुनी सुनाई बातों पर तो किसी को गलत, खराब या कुछ नेगेटिव तो नहीं कह रहे हैं जैसा डोकरी कह रही थी… बड़ा पाप लगता है सुनी सुनाई बातों को आगे बढ़ाने में.. यह grepwine है.. अफवाह है की कल यमराज की मीटिंग है.. एक केस ऐसा आया है की एक पाप का किसी के उपर आरोपन करना है.. नाम लिखना है.. बस इंतज़ार है की कोई एक ऐसा आदमी मिल जाए बस जो चुगली कर रहा हो या बिना देखे समझे जाने किसी के बारे में कोई गलत बात बोल रहा हो… बस आप अपना ध्यान रखना कही आप उस लिस्ट में शामिल ना हो जावो जिसके नाम पाप थोपना है…

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Moral story in hindi में आपको हमेशा की तरह एक फ़कीर के बहाने परम तत्व के बारे में बताने जा रहा हूँ.. एक फ़कीर ने मौन धारण कर लिया.. तय किया कि जब मौत बिल्कुल पास होगी तब ही कुछ बोलेगा.. हालाँकि ज्ञानी लोगों का यह मानना है कि मौत तो आती ही तब है जब आदमी सब कुछ भूल जाता है.. याद रहे तो वो मौत कैसी? जब मोह खत्म होगा और भूल पड़ेगी तभी तो मौत आती है.. चेतना और मोह हो तब तक क्या मौत? खैर! फ़कीर अपनी मौज में रहता.. एक दिन चाँदनी रात में अपनी ही धुन में पगलाया फकीर ना जाने कैसे पड़ोसी राज में चला गया.. गुप्तचरों ने सवाल पर सवाल पूछे.. फ़कीर मुस्काये पर बोले नहीं.. गुप्तचरों ने पूरी कोशिश की पर फ़कीर टस से मस नहीं.. आखिर में एक गुप्तचर ने दुश्मन मानकर जोर से छूरा घोंप दिया.. खून के फव्वारे छूटे.. फ़कीर आखिरकार बोला…. तत्त्वमसी… वह तूँ ही है.. सालों की साधना और शब्द एक तत्वमसि….. यह जीवन का सार है.. हम ताउम्र बोलते रहते हैं मगर मर्म पकड़ नहीं पाता.. पकड़ में कैसे आये मर्म.. ध्यान तो कहीँ और रहता है.. फ़कीर ने कहा कि वह तूँ ही है.. सब कुछ तूँ ही है जबकि हम ताउम्र मैं मैं करते रहते हैं मगर अहम ब्रह्मस्मि .मैं ही ब्रहम हूँ और तत्तत्त्वसी अर्थात वह तूँ ही है को समझ नहीं पाते हैं… नानक जी ने एक बालक से पूछा कि तूँ बहुत छोटा है.. तेरी कहाँ अभी मौत है? अभी बालक है.. जवान होगा फिर बुढ़ा होगा… बालक बोला कि गुरुदेव! मेरी माँ जब चूल्हा जलाती है और बड़ी लकड़ी जब जलती नहीं है तब छोटी छोटी लकड़ियों को जलाती है.. बहुत बार वो सिर्फ छोटी लकड़ियों को ही जलाती है.. वैसे ही ईश्वर का क्या भरोसा.. कभी बड़ी तो कभी छोटी लकड़ी जला देता है… नानक जी बोले.. तत्त्वमसी.. वह तूँ ही है जिसको मैं ढूँढ रहा था.. मो को कहाँ ढूंढे रे बंदे?. मैं तो तेरे पास मैं..ना मैं मंदिर ना मैं मस्जिद.. ना क़ाबे कैलाश में… खोजी को तुरंत मिलूँगा… पल भर की तलाश में… मर्म यह है कि सब कुछ हम ही हैं.. बाहर मत भटको.. हेली महारी बाहर भटके कांई थारे सब सुख है घट माहीं….सब कुछ आप ही हैं.. आप से बढ़कर कुछ भी नहीं है…Moral story in hindi का सार है कि चाहे तो बना दे.. चाहे तो बिगाड़ दे.. जीवन तेरा है.. चाहे तो सुरूप दे चाहे तो कुरूप दे.. रूप देना तेरे हाथ में है.. जब सब कुछ तूँ ही है तो तो फिर तूँ भी आज उस कुम्हार की तरह बन जा जिसने सुरूप देना सीख लिया.. एक कुम्हार मिट्टी से चिलम बनाते बनाते रुक गया.. मिट्टी ने पूछा कि रुक क्यों गए? कुम्हार बोला आज मेरी मति फिर गयी है.. अब मैं चिलम नहीं बनाकर सुराही बनाने जा रहा हूँ.. मिट्टी बोली आज पहली बार जीवन में तूँ वो बन गया है जो तुझे बहुत पहले बनना था.. आज तेरी तो मति बदली है .मेरी तो जैसे जिंदगी ही बदल जायेगी.. कुम्हार बोला कैसे? मिट्टी बोली कि चिलम ख़ुद भी जलती है और औरों को भी जलाती है.. सुराही ख़ुद भी ठंडी और दूसरों को भी ठंडक देती है.. दोस्तों! यही जीवन है.. इसको कहते हैं कि तत्वमसी… वह तूँ ही है.. पर पहचान अपने को.. कुछ बालक ज्यों बचपन में ही जान लेते हैं और कुछ बहुत देर से जानते हैं और कुछ कभी भी नहीं जान पाते हैं.. पहचानो आप कौन?

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एक दानी राजा एक दिन सोचता है कि जीवन में बहुत दान किया मगर सर्वोतम दान नहीं किया… inspirational story आज जो कोई सबसे पहले माँगने आयेगा उसको दिल खोलकर दान करूँगा.ना भविष्य की चिंता करूँगा और ना दान देते समय कुछ सोचूँगा.. आज तो कोई राजपाट माँग ले तो भी कदम पीछे नहीं करूँगा..थोड़ी देर में एक भिखारी आता है.. राजा उसको एक तांबे का सिक्का देता है.. भिखारी बेहद ख़ुशी से बाहर जाता है.. मगर थोड़ी ही देर में उसकी ख़ुशी खत्म हो जाती है जब वो सिक्का गंदे पानी के नाले में पड़ जाता है.. भिखारी अब नाले में तलाशे सिक्के को.. मगर सिक्का मिला नहीं.. उदास और निराश राजा के पास जाता है और सारी hindi story सुनाता है.. राजा इस बार उसे चाँदी का सिक्का देता है.. भिखारी बाहर जाता है ख़ुशी ख़ुशी मगर यह क्या? उसके तो पैर वापस गंदे नाले की और बढ़ गए और तांबे के सिक्के को पाने की जिद और गंदगी से संघर्ष.. राजा तक संदेश जाता है तो राजा बुलाकर इस बार सोने का सिक्का देता है.. भिखारी पिछली बार से बेहद खुश मगर बाहर जाते ही वही नाला.वही गंदगी और वही माथापछी..inspirational story. राजा इस बार वापस बुलाते हैं और हीरा मानक मोती देकर रवाना करते हैं.. मगर यह क्या… भिखारी तो वही नाला और वही गंदगी और वही सब कुछ.. इस बार राजा ने बुलाया और सोचा कि आज तो प्रण ही कर रखा है सब कुछ देने का तो फिर कंजूसी क्यों… अब राजा ने अपना राजपाट भी दे दिया भिखारी को… भिखारी अब राजा है.. सत्ता, वैभव और संपदा अकूत है.. मंत्री- अधिकारी बोले की आदेश करो राजन! क्या एजेंडा है? भिखारी जो अब राजा बन चुका था… वो आदेश क्या देगा.. आप सोचो.. भिखारी ने कहा की बाहर नाले में मेरा सिक्का कीचड़ में पड़ा है.. मुझे वो सिक्का चाहिए…… दोस्तों यही हमारा जीवन है.. हमारे पास घर, परिवार, मित्र और रिश्तेदार है.. माँ ,बाप ,भाई, बहिन, बेटा, बेटी , पोता, पोती, भांजा, भानजी हजारों सिक्के हैं… मगर हमारा ध्यान तो बस उस भिखारी की तरह बस नाला गंदगी और सिक्के तक सीमित है.. दोस्तों आप और हम सब अरबपति हैं.. हमारे पास रिश्तों की अकूत संपत्ति है मगर हम कस्तूरी मृग ज्यों नाभि मे छुपे खजाने को पहचान नहीं पाए हैं.. हमारा शरीर सिक्कों से थोड़ा ही मापेंगे हम… आप अपनी आँख किसी को करोड़ रु में भी नहीं देते हो.. तब सोचो की हाथ, पैर, जीभ और अनेकों अंग मिलाकर आप अरबपति हुए कि नहीं.. आज. के बाद मत कहना कि सिक्के चाहिए… घर में ही प्रेम के असली सिक्के पड़े हैं और बाहर भटक रहे हो गंदगी में…. अब आप कहोगे कि आपInspirational story सुनाते हो.. Inspirational story और. Motivation story और life और positive thoughts से पेट थोड़े ही भरता है? जीवन इन बातों से थोड़ा ही चलता है.. Story और life के सच. में थोड़ा तो अंतर रखो… मेरी दादीजी ने बचपन में एक hindi story सुनाई थी.. एक बार एक राजा की मौत पर हाथी द्वारा माला बार बार एक फ़कीर के गले में डालने में पर ना चाहते हुए भी फ़कीर को राजा बना दिया जाता है.. अब फ़कीर से पूछे सब दरबारी कि राज पाट कैसे चलायें? फ़कीर बोला की जैसे पहले चलता था वैसे ही राजपाट चलने दो.. मेरे लिए तो बस हलवा ला दो.. फ़कीर की सोच सिर्फ इतनी की जो होगा वो होकर रहेगा.कुछ भी बस में नहीं है अपने.. बस जीवन में जो आज. मिल गयी वो ख़ुशी ही जीवन का हलवा है.. अतीत बीत गया.. वर्तमान चल रहा है उसका आनन्द लो.. हलवा खावो.. क्या मालूम भविष्य में यह हलवा मिले ना मिले.. दरबारी कहते कभी कि जीवन और राजपाट हलवा या कोई Hindi stories नहीं है.. बड़ा मुश्किल है राजपाट.. फकीर कहता कि आप तो कोई नहीं चाहते थे कि मैं राजा बनूँ.. मगर मैं राजा बना.. मेरे लिए राजपाट का मतलब है सिर्फ़ आज का हलवा और आज का पेट भर जाना.. ना इससे कम ना इससे अधिक.. Philosophy of हलवा चलती रही और एक दिन पड़ोसी राजा ने फ़कीर राजा के राज पर हमला कर दिया.. सेनापति ने कहा कि निर्देश दें.. कैसे और क्या रणनीति बनाएं.. फ़कीर बोला वो सब आप देख लो.. मेरे लिए तो हलवा ला दो.. थोड़ी देर में पड़ोसी राजा फ़कीर के राज पर कब्जा कर लेता है.. फ़कीर राजा कैद में है.. पड़ोसी राजा कहते हैं कि आपके साथ क्या सलूक किया जाय.. फ़कीर बोला सलूक क्या करना है.. इतने दिन हलवा मैंने खाया.. अब वो हलवा आप खा लेना.. पड़ोसी राजा इस हलवे की philosophy से बड़ा खुश हुआ.. राजपाट वापस मिल जाता है फकीर को.. दरबारी पूछते हैं की वित्त की व्यवस्था कैसे करें राजन! फकीर बोला कि मेरे लिए तो बस हलवा ला दो बाकि आप देख लो.. Hindi story का यह भाव अब भी आप ग्रहण नहीं करते हो तो कमी मेरी Hindi stories inspirational story और positive thoughts में नहीं आपके भावों में ही अभाव है.. Mast रहें और फ़कीर सा हलवा खाते रहें..

motivational stories in hindi

Best hindi stories में बताया जाता है की असुर बड़े वीभत्स, हिंसक, अपवित्र, गंदे, मैले कुचले होते हैं.. वास्तव में यह spiritual story में असुर का मानवीकरण होता है.. आज हम इंसानो में भी आसुरी तत्व बढ़ते जा रहें है.. आपने spiritual story में पढ़ा ही होगा जब श्री राम कहते हैं की रावण को मैंने नहीं उसके मैं ने मारा है.. खैर! एक समय की बात है एक जंगल में एक राही को भटकते हुवे एक सन्यासिन दिखती है.राहगीर उससे पूछता है कि आप इस जंगल में क्या कर रही हैं ?सन्यासिन कहती है की करो तो काम बहुत है ..नहीं करो तो कुछ नहीं है.कुछ नहीं करने में भी बहुत कुछ कर जाते हैं . बहुत से लोग बहुत कुछ करने पर भी कुछ नहीं कर पाते हैं..राही कहता है कि मेरी समझ से परे हैं आपकी बातें..सन्यासिन कहती है कि इस संसार के लोगों का यही फसाना है ..जिस बात में स्वार्थ हो ,वह बात पल में समझ जाते हो. समझ में क्या पल-पल वही आपके दिल और दिमाग में छाई रहती है. जो बात तुम्हारे स्वार्थ की नहीं है ..उसे तुम कभी समझना नहीं चाहते हो..तुम्हारी सोच में चौबीसों घंटे लाभ और हानि गणित रहता है ..जीवन की spiritual story, a moral story in hindi ,God stories,short stories, best spiritual story,hindi motivational story, inspirational story को ना तुम जानते हो और ना तुम समझना चाहते हो… तुम जीवन के बड़े फॉर्मूले खोज लेते हो पर ध्यान और खोज वहीँ तक है जहाँ तक तुम्हारा स्वार्थ है.. तुम अर्थ को छोड़ो तो ही मैं spiritual story का मर्म बता और समझा सकूँगी.. खैर सुनो.. मैं यहाँ दो खरगोशों , दो बाजों, एक साँप, एक गधा और एक शेर को ट्रेनिंग दे रही हूँ.. राही कहता की आपका तो हर एक शब्द मुझे अनजाना लगता है.. मुझे तो यहाँ कोई पक्षी और पशु नहीं दिख रहा है.. मेरी चेतना काम नहीं कर रही है.. हम सीधे साधे सरल आदमी आपकी spiritual story तभी समझ सकते हैं जब आप सरल भाषा में कुछ कहो.. सन्यासीन बोली वाह रे मानव! जब जरूरत हो तो होशियार नहीं तो गफलत और भोलेपन का नाटक… यह सन्यासिन तुझे spiritual story का भेद बतायेगी.. दो बाज है तुम्हारी आँखे जो अच्छा बुरा सब देखती है मगर ग्रहण सिर्फ स्वार्थ की नजर से करती है.. मैं इसको सिर्फ अच्छी और परोपकार की नजर रखने की ट्रेनिंग दे रही हूँ.. Best hindi stories में दो चील है तुम्हारे हाथ जो सिर्फ स्वार्थ होने पर आगे बढ़ते हैं और चोट करने की सोच रखते हैं… मैं इन हाथों को लोक कल्याण में खड़े होने की ट्रेनिंग दे रही हूँ.. दो खरगोश है तुम्हारे पैर जो भटकते रहते हैं.. प्रॉब्लम आने पर रुक जाते हैं ज्यों खरगोश प्रॉब्लम को देख आँखे बंद कर लेते हैं.. मैं इन पैरों को बिना रुके शान्त चित् और कर्म का पाठ पढ़ाती हूँ.. एक गधा है जो रात दिन भाग रहा है.. वो तुम्हारा शरीर है.. हमेशा शिकायती, बेमन बोझा उठाने वाला… मैं इसको ट्रेनिंग दे रही हूँ ताकि इसका आलस भगा सकूँ… एक साँप है जो 32 दांतों के बीच है यानी तुम्हारी जीभ.. यह बेमतलब लपलप लपलप करती रहती है.. बंद है.. बोलना बिल्कुल जरूरी नहीं है.. पंचायती बहुत पसंद है.. बस बिना मतलब जहर उगलना, डसना, काटना इसकी पसंद है.. मैं इसको निज अनुशासन फिर औरों पर शासन का पाठ पढ़ा रही हूँ.. एक शेर है.. Best hindi stories तो कहती है की वो गुलाम है पर वह ख़ुद को मालिक मान बैठा है.. मुझे उसका यह मैं खत्म करना है… दोस्तों.. Spiritual story थोड़ी बड़ी हो गयी है पर आप बताना की आपके बाज, खरगोश, गधे, शेर तो सब आनँद में है या उनको भी किसी ट्रेनिंग की या spiritual story, inspirational spiritual stories की जरूरत है…. Spiritual story और best hindi stories अच्छी लगे तो share जरूर करना सा.. ..

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2 thoughts on “Best hindi stories 2021”

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