मैं कहाँ गया?

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Best Moral Stories in Hindi 2020 …एक बार एक महात्मा जी समंदर के किनारे टहल रहे थे.. महात्मा जी ने देखा एक बच्चा वहाँ रोरहा है ..महात्मा जी ने बड़े प्यार से पूछा कि बालक तुम क्यों रो रहे हो? बालक ने कहा कि मेरे हाथ में जो यह प्याला है उसमें मैं इस समंदर को भरना चाहता हूँ….पर मेरा प्याला बहुत छोटा है और समंदर मेरी कल्पना से परे विशाल है . समंदर मेरे प्याले में आ नहीं सकता ..इसलिए मैं रो रहा हूंँ….बच्चे की बात सुनकर महात्मा जी के चेहरे की हवाइयाँ उड़ने लगी और महात्मा जी की आंखों में उदासी आ गई .महात्मा जी बच्चे के सामने बच्चे की तरफ फूट-फूट कर रोने लगे ..महाराज सोचने लगे जीवन भर सब कुछ प्राप्त करने की तलाश में, मैं रूपीअहंकार के साथ में जीता रहा जबकि जो ज्ञान था वही पर्याप्त था कल्याण के लिए… जीवन यूँ ही व्यर्थ में बीता दिया.. अपनी छोटी सी बुद्धि के सहारे सारी दुनिया का ज्ञान पाना चाहता था और उस चक्कर में जो ज्ञान प्राप्त किया उसका भी कोई प्रयोग नहीं कर पाया.

बालक ने महात्मा की तरफ़ देखा और अपना प्याला जोर से समंद की और फेंका और बोला की महाराज! मेरा प्याले में समंदर नहीं आ सकता मगर समंदर में मेरा प्याला तो जा ही सकता है… प्याला समंदर में जाए या समंदर प्याले में आये बात तो एक ही है… बात है अंदर समाने की.. अंदर प्रवेश की… भेद क्यों… प्याले और समंदर का…. महात्मा जी बालक की बात सुन रो रहे थे… पर बालक अब कहीं नहीं दिख रहा था… दोस्तों! बालक होता तो दिखता.. यह बालक हमारा अंतस मन है जो आपको और मुझे रोज़ समझाता है पर अपन नादाँ इसकी सुनते नहीं हैं..

दोस्तों! यही हमारा जीवन है… धन, दौलत, ज्ञान, रिश्ते या जो कुछ भी प्याले में है उसका आनँद नहीं ले रहे हैं और बस समन्दर को भरना चाहते हैं..

Best Moral Stories in Hindi 2020 राजा भरथरी अपनी पत्नी से बहुत ज्यादा लगाव था… दुर्संजोग से उनकी पत्नी पिंगला उनको छोड़ कर चली गयी… राजा पागलों की तरह चिल्लाये और रोये.. बस एक ही नाम होंठों पर… हाय मेरी पिंगला… कैसे रहूँ मैं.. मैं नहीं रह सकता… मैं क्यों जिंदा रहा.. मैं ही मर जाता…. है भगवान मैं नहीं रह सकता…. इतने में पास से गोरखनाथ जी निकले और बोले की राजन क्यों मैं मैं कर रह हो… मौत तो सबको आती है… एक दिन सबको जाना है.. कोई अमर पट्ठहा लिखवा कर नहीं लाया है.. राजन बोले की आपको नहीं मालूम मुनिवर! मैं पिंगला को बहुत चाहता हूँ… गोरखनाथ बोले की सबको लगता है उसका प्रेम ही प्रेम है बाकी प्रेम तुच्छ है… भरथरी बोले की मेरे समझ में नहीं आ रहा है की आप क्या कह रहे हैं… गोरखनाथ ने इतने में एक मिट्टी का लोटा हाथ में था, नीचे गिरा दिया और रोने लगे की हाय रे मेरा पसंद का लोटा फूट गया… मैं इसके बिना नहीं रह सकता….गोरखनाथ जोर जोर से रोने लगे.. हाय रे मेरा लोटा…अब मैं क्या करूँ? मैं नहीं रह सकता इस लोटे के बिना… भरथरी बोले की मुनिवर! आप इस लोटे के लिए रो रहे हो, मैं आपको हजारों लोटे दे सकता हूँ…. गोरखनाथ बोले की मैं तुझे हजारों पिंगला दे सकता हूँ… भरथरी ने कातर नजर से देखा.. गोरखनाथ ने अपनी माया से हजारों पिंगला बना दी और भरथरी से बोले की पहचानो राजन! आपकी पिंगला कौन सी है… भरथरी नि:शब्द! क्या बोले… कौन सी पिंगला उनकी यही पता नहीं चले… सब पिंगला सच्ची और सब पिंगला झूठी… सच क्या मालूम पता ही नहीं चले…. गोरखनाथ बोले की राजन! कोई भ्रम और माया नहीं है.. बस मैं और मेरी पिंगला का भाव छोड़ कर देखो.. मैं से बाहर निकल जावो एक बार.. फिर कोई भरथरी नहीं और कोई पिंगला नहीं…

दोस्तों यही हमारा जीवन है जहाँ हम हजारों पिंगला रानी से प्रेम करते हैं और हम कहते हैं की हम उसके बिना रह नहीं सकते हैं… धन, दौलत, वैभव जैसी अनेकों पिंगला है जिसके लिए हम मर रहे हैं… ख़ुद मर रहे हैं पर मैं नहीं मर रहा है…. आज इसBest Moral Stories in Hindi 2020 में हमको मैं मारने का संदेश है.. बस इतनी सी best moral story in hindi 2020 और इतना सा ज्ञान …. फ़िर मिलते हैं कोई औरBest Moral Stories in Hindi 2020 के साथ WWW.SHREEUMSA.COM

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