बस अरज है एक बात मानलो

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एक पाप है जिसकी एंट्री लेखा पुस्तकों में चढ़ानी बाकि है.. -

hindi kahani राजा जनक स्वर्ग और नरक की मझधार में बैठे हैं.. आज तक यमराज के कभी समस्या नहीं आई पाप और पुण्य के लेखा जोखा में… राजा जनक वैदेही.. इंद्रियों पर नियंत्रण.. ज्ञान, विज्ञान, धर्म, नीति के जानकार… यमराज ख़ुद आज मोनिटरिंग कर रहे हैं.. ऐसा क्या हो रहा है की राजा जनक का विमान स्व संचालित व्यवस्था के तहत स्वर्ग नरक के बीच खड़ा है.. आदमी या तो स्वर्ग या नरक जाता है.. यह बीच वाली दुविधा कैसे? सारे लेखे देख लिए मगर हिसाब पकड़ में नहीं आ रहा… इतने में चित्रगुप्त पकड़ लेते हैं कारण को.. वो कहते हैं की  एक बार एक कसाई राजा जनक से पूछते हैं की इस रंग की गाय आपने जाती देखी  है क्या? राजा जनक बताते हैं की हाँ अभी अभी निकली है और पूर्व दिशा की और गयी है.. राजा जनक को पता नहीं की पूछने वाला कसाई है और वो गाय को मार देगा… राजा जनक को गाय हत्या का दोष लगा है.. चूँकि राजा जनक विदेही है.. पर थोड़ा सा पाप तो किया ही है.. थोड़ी सी अवधि के लिए ही सही मगर पाप के थोड़े से तो भागी है ही.. इस कारण नरक में थोड़ा सा रुकना पड़ा… दोस्तों कहानी का सार यह है की हम जाने अंजाने बहुत बार किसी दूसरे का नुकसान कर जाते हैं.. हमारी नागिन रूपी जीभ बस लपलप करती रहती है.. इसको बस बकबक से मतलब है.. कान का सुना बहुत बार गलत होता है मगर कभी कभी आँखों का देखा भी सच नहीं होता.. जीभ को जज मत बनने दो… एक और हिंदी कहानी भी है जो हमारे आसपास में अक्सर सुनाई जाती है की किसी भी नतीजे पर जाने से पहले और कुछ बोलने से पहले या किसी भी काम को करने से पहले कुछ देर रुको.. फिर निर्णय लो… जल्दी का काम शैतान का… खैर एक hindi kahani है.. समय एक सेठ सालों बिनज व्यापार करके गाँव आता है.. सेठानी को surprize देने के चक्कर में रात को घर में चोरों की तरह घुसता है.. सेठ घर के अंदर का हाल देखकर आग बबुला हो जाता है.. सेठानी के साथ यह पुरूष कौन.. सेठ तलवार ले आता है पर पिताजी की सीख थी की कोई भी काम करने से पहले कुछ सोचो.. कुछ रुको.. इतने में सेठानी जाग जाती है और साथ में सो रही बेटी को नींद से जगाती है.. सेठ आश्चर्य में.. सेठानी कहती है की आप तो यह पांच साल की थी तब छोड़कर व्यापार के लिए चले गए.. मैंने कैसे अपनी बेटी का ध्यान  रखा.. यह मैं ही जानती हूँ.. इसे मैं लड़के के भेष में रखती हूँ ताकि कोई परेशानी ना हो.. सेठ बोला! है भगवान! आपने बचा लिया…. दोस्तों! जीवन में धारणा बनावो पर थोड़ा सा समय लो.. कानों का कहना कम मानो.. आँखो देखी पर भी विश्वास थोड़ा सा समय लेकर करो.. मूल भाव इतना की किसी के कहने पर राय मत बनावो…हम भी राजा जनक की तरह एक नहीं हजारों सच ऐसे बोलते हैं जो हमारी नजर में सच होते हैं मगर वो सच नहीं होते.. एक गाँव में एक बूढ़ी औरत कहते जा रही थी की PTI बहुत खराब है.. PTI बहुत खराब है.. एक दिन PTI ने पूछा की माताजी आप रोज़ कहते हैं कि PTI खराब है.. आपका क्या बिगाड़ दिया PTI ने… माताजी बोला की बेटा ! मेरा तो दुनिया में कोई नहीं है.. अकेली रहती हूँ.. गाँव में माँग कर पेट भर लेती हूँ.. मेरा PTI क्या बिगाड़ करेगा? मेरे ना बेटे ना पोते.. किसको पिटेगा PTI? फिर आप माताजी PTI को खराब क्यों कह रही है… बेटा! मेरा क्या दोष? मैं तो सुनी सुनाई बातों पर कह रही हूँ की PTI खराब है.. दोस्तों! आप भी किसी की सुनी सुनाई बातों पर तो किसी को गलत, खराब या कुछ नेगेटिव तो नहीं कह रहे हैं जैसा डोकरी कह रही थी… बड़ा पाप लगता है सुनी सुनाई बातों को आगे बढ़ाने में.. यह grepwine है.. अफवाह है की कल यमराज की मीटिंग है.. एक केस ऐसा आया है की एक पाप का किसी के उपर आरोपन करना है.. नाम लिखना है.. बस इंतज़ार है की कोई एक ऐसा आदमी मिल जाए बस जो चुगली कर रहा हो या बिना देखे समझे जाने किसी के बारे में कोई गलत बात बोल रहा हो… बस आप अपना ध्यान रखना कही आप उस लिस्ट में शामिल ना हो जावो जिसके नाम पाप थोपना है… what you feel about … .hindi kahani

अब हलवा आप खाना

आपकी कीमत आपको मालूम नहीं है शायद

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9 thoughts on “बस अरज है एक बात मानलो”

  1. हनुमान सिंह मोटसरा व्याख्याता

    वाह सर जी बहुत ही अच्छी प्रेरणादायक प्रसंग है जी इसको हमें जीवन में ढालनी चाहिए।

  2. Pingback: संसार में सबसे सुंदर क्या है? - ShreeUMSA.com

  3. Pingback: Karma bai ki jivani कौन कहता है भगवान खाते नहीं Karma bai ka khichda

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